वैभव लक्ष्मी कथा क्रमश:..

माँ जी ने कहा: ‘बेटी! सुख और दुख तो धूप छांव जैसे होते हैं। सुख के पीछे दु:ख आता है, तो दु:ख के पीछे सुख भी आता है। धैर्य रखो बेटी! और तुझे क्या परेशानी है? अपने दुख की बात मुझे सुना। तेरा मन भी हलका हो जायेगा और तेरे दुख का कोई उपाय भी मिल जायेगा।’
माँ जी की बात सुनकर शीला के मन को शांति मिली। उसने माँ जी से कहा: ‘माँ! मेरी गृहस्थी में भरपूर सुख और खुशियाँ थीं, मेरे पति भी सुशील थे। अचानक हमारा भाग्य हमसे रूठ गया। मेरे पति बुरी संगति में फँस गये और बुरी आदतों के शिकार हो गये तथा अपना सब-कुछ गवाँ बैठे हैं तथा हम रास्ते के भिखारी जैसे बन गये हैं।’
यह सुन कर माँ जी ने कहा: ‘ऐसा कहा जाता है कि , ‘कर्म की गति न्यारी होती है’, हर इंसान को अपने कर्म भुगतने ही पड़ते हैं। इसलिए तू चिंता मत कर। अब तू कर्म भुगत चुकी है।

Vaibhav Laxmi katha Continue...

Maa ji said- “Daughter! Happiness and sorrow is like a sun shade. Happiness comes after sorrow and sorrow comes after happiness. Keep patience daughter. And what is your problem? You can tell me your problem. So, that your mind get relief and some solution will also discover. ”
Sheela’s mind get peace to listen Maa ji’s talk.She said to Maa ji- “Maa! I lived very happy and peacefully with my husaband.My husband was also gentle.Suddenly,my fortune get angry on us.My husband invoved with bad friendship and get some bad habits too.He lost everything and our condition like a beggar. ”
Maa ji said to heard her – “It is said that “Karmas speed is unfathomable.” Every person has to pay for their karma. So, don’t worry. You had completed your suffering.”