वैभव लक्ष्मी कथा क्रमश:...

माँ जी ने हँसकर कहा: ‘क्यों? भूल गई? हर शुक्रवार को लक्ष्मी जी के मंदिर में भजन-कीर्तन होते हैं, तब मैं भी वहाँ आती हूँ। वहाँ हर शुक्रवार को हम मिलते हैं।’
पति जब से गलत रास्ते पर चला गया था, तब से शीला बहुत दुखी हो गई थी और दुख की मारी वह लक्ष्मीजी के मंदिर में भी नहीं जाती थी। बाहर के लोगों के साथ नजर मिलाते भी उसे शर्म लगती थी। उसने दिमाग पर जोर दिया पर वह माँ जी उसे याद नहीं आ रही थीं। तभी माँ जी ने कहा: ‘तू लक्ष्मी जी के मंदिर में कितने मधुर भजन गाती थी। अभी तू दिखाई नहीं देती थी, इसलिए मुझे हुआ कि कहीं तू बीमार तो नहीं हो गई है न? ऐसा सोचकर मैं तुझसे मिलने चली आई हूँ।’
माँ जी के अति प्रेम भरे शब्दों से शीला का हृदय पिघल गया। उसकी आँखों में आँसू आ गये। माँ जी के सामने वह बिलख-बिलख कर रोने लगी। यह देख कर माँ जी शीला के नजदीक आयीं और उसकी सिसकती पीठ पर प्यार भरा हाथ फेर कर सांत्वना देने लगीं।

Vaibhav Laxmi Katha Continue..

Maa said with smile- “Why? You forget me? Every Friday, I am also come on the bhajan-chants at temple of Laxmi Ji. We met there on every Friday.”
Sheela became very sad after her husband’s wrong behavious and she stopped to go temple oof Laxmi ji. She gets ashamed to meet with other people. She tried to recognize but she could not remember that Maa. Then Maa Ji said- “You sang very melodious bhajan at Laxmi’s temple.I did not seea you these day, Hence , I thought you became sick, isn’t it? So, I came to meet you.”
Sheela heart get melted to listen Maa ji,s word. Tears came to her eyes. She started to cry bitterly in front of Maa ji. Maa ji come closer to Sheela to saw her condition and console her.