संकष्टी चतुर्थी २०१७

पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं और अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं। संकष्टी चतुर्थी अगर मंगलवार के दिन पड़ती है तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं और इसे बहुत ही शुभ माना जाता है।

प्रत्येक मास के दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि को गणेश जी के पूजन का विधान है। शुक्ल-पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से सभी प्रकार की बाधाओं को दूर कर श्री गणेश जी मनुष्य को हर प्रकार के सुख का आशीर्वाद देते हैं। गणेश जी को विघ्न विनाशक कहा गया है, इसलिए श्री गणेश जी की पूजा से हर विघ्न दूर हो जाते हैं ।
प्रत्येक मास की संकष्टी चतुर्थी की महत्त्वपूर्ण बातें :-

1. माध कृष्ण पक्ष : माघ कृष्ण पक्ष के चतुर्थी को “भालचंद्र ” गणेश जी की पूजा करें। यह “सकट चौथ” की नाम से भी जानी जाती है।इस व्रत में तिल से बने हुये 10 लड्डू में से 5 लड्डू का भोग लगायें तथा शेष 5 लड्डू को ब्राह्मणों को दान में दे। ब्राह्मण ऋषिशर्मा की कथा का श्रवण करें। पूजन के बाद भोजन में 10 तिल के लड्डू ग्रहण करें। इस वर्ष माध कृष्ण पक्ष चतुर्थी १५ जनवरी, २०१७ (रविवार) को है ।

2. फाल्गुन कृष्ण पक्ष : फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्थी को “हेरम्ब” गणेश की पूजा होती है। खीर तथा कनेर की फूल को मिला कर गुलाबांस की लकड़ी से हवन किया जाता है। पूजा के बाद ब्राह्मण विष्णु शर्मा की कथा सुने अथवा सुनाये। । व्रती को केवल घी और चीनी हीं ग्रहण करना चाहिये। इस वर्ष फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्थी १४ फरवरी,२०१७ (मंगलवार) को है । मंगलवार दिन होने के कारण यह अंगारकी चतुर्थी भी कही जायेगी।

3. चैत्र कृष्ण पक्ष – चैत्र कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश जी के “विकट” स्वरूप का पूजन किया जाता है। इस व्रत के में राजा मकरध्वज की कथा कही और सुनी जाती है। इसमें घी और बिजौरे नीबू से हवन किया जाताहै, जिससे नि:संतानों को भी संतान की प्राप्ति होती है। इस वर्ष चैत्र कृष्ण पक्ष चतुर्थी ०५ मार्च, २०१८ (सोमवार) को है ।

4. वैशाख कृष्ण पक्ष – वैशाख कृष्ण पक्ष चतुर्थी को गणपति के “वक्रतुण्ड” स्वरूप की पूजा करनी चाहिये। इस व्रत में ब्राह्मण धर्मकेतु की कथा को कहने और सुनने का विधान है। इस व्रत में कमलगट्टे के हलवे का भोजन करना चाहिये। इस वर्ष वैशाख कृष्ण पक्ष चतुर्थी १४ अप्रैल,२०१७ (शुक्रवार) को है ।

5. ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष – ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को “आखू (मूषक) रथा” गणेश की पूजा करनी चाहिये। इस व्रत में गणेश जी को हलवा,पूरी, लड्डू आदि का भोग लगाने का विधान है। भोग की सभी सामग्री शुद्ध घी में बने होने चाहिये। इस व्रत में ब्राह्मण दयादेव की कथा कही जाती है। इस वर्ष ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष चतुर्थी १४ मई,२०१७ (रविवार) को है ।

6. आषाढ़ कृष्ण पक्ष : आषाढ़ कृष्ण पक्ष चतुर्थी के गणेश जी का नाम “लम्बोदर” है। इस तिथि को पूजन करन के पश्चात राजा महिजित की कथा सुने अथवा सुनाये। व्रत के बाद ब्राह्मणों को वस्त्र दान करें तथा भोजन करायें। इस वर्ष आषाढ़ कृष्ण पक्ष चतुर्थी १३ जून,२०१७ (मंगलवार) को है । मंगलवार दिन होने के कारण यह अंगारकी चतुर्थी भी कही जायेगी।

7. श्रावण कृष्ण पक्ष : श्रावण कृष्ण पक्ष में गणेश जी का पूजन विधि-विधान से करें। गणेश जी को लड्डु अर्पित करें।प्रात:काल सफेद-तिल मिश्रित जल से स्नान करें। रात्रि को चंद्रमा के पूजन के बाद संतानादि सर्वसिद्धिदायक की कथा कहें अथवा सुने । पूजा के बाद ब्राह्मण की पूजा करें तथा 5 लड्डु ब्राह्मण को दान करीं एवं भोजन कराये। इस वर्ष श्रावण कृष्ण पक्ष चतुर्थी १२ जुलाई,२०१७ (बुधवार) को है ।

8. भाद्र कृष्ण पक्ष :(बहुला संकष्टी चतुर्थी) भाद्र कृष्ण पक्ष में “एकदंत” स्वरूप की पूजा की जाती है। है। यह संकटनाशक चतुर्थे के नाम से जाना जाता है। इस व्रत में राजा नल की कथा कही और सुनी जाती है। इस वर्ष भाद्र कृष्ण पक्ष चतुर्थी ११ अगस्त,२०१७ (शुक्रवार) को है ।


9. भाद्र शुक्ल पक्ष : भाद्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी को “सिद्धिविनायक” गणेश की पूजा की जाती है। इस व्रत में गणेश जी के पूजा दिन को की जानी चाहिये। प्रात:काल सफेद-तिल मिले हुये जल से स्नान करें। गणेश जी को 21 लड्डुओं का भोग लगाये। पूजा के बाद स्यमंतक मणि की कहानी कहे अथवा सुने। इस वर्ष भाद्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी २५ अगस्त,२०१७ (शुक्रवार) को है।

10. आश्विन कृष्ण पक्ष : आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्थी को “कृष्ण” नामक गणेश जी की पूजा होती है। हल्दी और दूब से हवन किया जाता है। इसे संकटा चतुर्थी भी कहते हैं। पूजन के बाद कृष्ण-बाणासुर की कथा कहने चाहिये। इस व्रत में केवल फलों का सेवन करें। इस वर्ष आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्थी ०९ सितम्बर,२०१७ (शनिवार) को है ।

11. कार्तिक कृष्ण पक्ष : कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी को “पिंग” स्वरूप गणपति की पूजा होती है। घी और उड़द मिलाकर हवन किया जाता है।पूजन के बाद ब्राह्मण को भोजन करायें तथा स्वयं मौन रहकर एक हे बार भोजन ग्रहण करें। पूजन के बाद वृत्रासुर दैत्य की कथा सुने अथवा सुनाये।। इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी ०८ अक्टूबर,२०१७ (रविवार) को है । यह करवा चौथ के नाम से प्रसिद्ध है।

12. मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण पक्ष : मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण पक्ष चतुर्थी “गजानन ” स्वरूप को समर्पित है। पूजा तथा अर्घ्य के बाद ब्रह्मण को भोजन करायें। तत्पश्चात जौ, चावल, चीनी, तिल व घी मिलाकर हवन करें तथा राजा दशरथ की कथा कहे अथवा पढ़े । इस वर्ष मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण पक्ष चतुर्थी ०७ नवम्बर, २०१७ (मंगलवार) को है । मंगलवार दिन होने के कारण यह अंगारकी चतुर्थी भी कही जायेगी।


13. पौष कृष्ण पक्ष : पौष कृष्ण पक्ष चतुर्थी विघ्नविनाशिनी कहलाती है। इस तिथि को गणेश के “लम्बोदर” रूप का पूजन करना चाहिये। दूध की खीर तथा घी से हवन करना चाहिये। पूजन के बाद राक्षस राज रावण की कथा कहनी अथवा सुननी चाहिये । इस वर्ष पौष कृष्ण पक्ष चतुर्थी ०६ दिसम्बर, २०१७ (बुधवार) को है ।

14. अधिकमास कृष्ण पक्ष : अधिकमास कृष्ण पक्ष चतुर्थी को ‘गणेश्वर’ की पूजा की जाती है। श्री गणेश जी को लाल कनेर तथा लड्डु का भोग अर्पित करें। पूजन के समय लाल चंदन, रोली, चवल तथा दूब एक-एक कर अर्पित करें। पूजा के बाद राजा चंद्रसेन की कथा सुने