माँ वैभव लक्ष्मी | Maa vaibhav laxmi puja vidhi in hindi

“माँ वैभव लक्ष्मी” का व्रत शीघ्र फलदायी है। अगर फल शीघ्र ना मिलें तो एक महीने के बाद फिर से इसे शुरु करना चाहिए और जब तक इच्छानुसार फल ना मिले तब तक व्रत तीन-तीन महीने पर करते रहना चाहिए।

Worship Process of Maa vaibhav laxmi

“Maa Vaibhav Laxmi ” fast is quick result oriented fast. If you could not get immediate result then, again restart the fast after one month interval and keep fast continuously after every three month till you get desired result.

व्रत के मुख्य नियम:-(Important rules of fast)

1. इस व्रत को परिवार का कोई भी सदस्य कर सकता है। यदि घर की स्त्रियाँ इस व्रत को करें तो अति उत्तम माना जाता है।लेकिन यदि परिवार में कोई विवाहित स्त्री ना हो तो कुँवारी कन्या भी इस व्रत को कर सकती है। यदि घर के पुरुष इस व्रत को करें तो अति उत्तम फल देनेवाला कहा जाता है।
1. Any family member can keep this fast. It is more result oriented if women member keep this Vaibhav-laxhmi fast. If there are no married women at home then unmarried girl can also keep thee fast. It is most beneficial if, male family member keep this fast.
2. यह व्रत प्रत्येक शुक्रवार को किया जाता है। इस व्रत को शुरु करने से पहले यह तय कर लें की आप कितने शुक्रवार तक यह व्रत करेंगे। ( जैसे -11,21, इत्यादि)। जब आप व्रत आरम्भ करें तभी यह संकल्प करें कि आप इस व्रत को 11 या 21 या और अधिक शुक्रवार तक करेंगे तथा व्रत समाप्त होने पर यथापूर्वक उद्यापन करेंगे।
2. This fast keeps on every Friday. You must decide that how many Friday you will keep this fast before start the fast; like 11, 21, 51 etc..So, that you can take oath / sankalp at the beginning of “Vaibhav Laxhmi” fast and you will do the udyapan after completion of fast.
3. व्रत के शुक्रवार को स्त्री रजस्वला हो या सूतकी हो अथवा यदि आप घर से बाहर हों तो उस शुक्रवार को व्रत ना करें। हमेशा व्रत अपने घर पर ही करें।
3. During Menstruation period or any other restricted day for worship then do not keep fast on those day.You could not keep fast when you are our of home or travelling. This “Vaibhav laxhmi” fast must keep at your own home.
4. यह व्रत पूरी श्रद्धा और पवित्र भाव से करना चाहिए। बिनाभाव से या अप्रसन्न होकर यह व्रत नहीं करना चाहिए।
4. People must keep this fast with full dedication and purity. Should not keep fast without dedication or unhappy mood.
5.एक बार व्रत पूरा होने के बाद दोबारा से फिर मन्नत मान कर व्रत कर सकते हैं।
5. You can also start this fast again after completion of one desire.
6. माता लक्ष्मी देवी के अनेक स्वरूप हैं। उनमें उनका ‘धनलक्ष्मी’ स्वरूप ही ‘वैभवलक्ष्मी’ है और माता लक्ष्मी को श्रीयंत्र अति प्रिय है। व्रत करते समय माता लक्ष्मी के विविध स्वरूप यथा श्रीगजलक्ष्मी, श्री अधिलक्ष्मी, श्री विजयलक्ष्मी, श्री ऐश्वर्यलक्ष्मी, श्री वीरलक्ष्मी, श्री धान्यलक्ष्मी एवं श्री संतानलक्ष्मी तथा श्रीयंत्र को प्रणाम करना चाहिए।
6. There are some many forms of Goddes Laxmi. “Dhanlaxmi” & “Vaibhavlaxhmi” form and “Sri Yantra” is most favourite of Goddess Laxmi. You must meditate towards diffeerent forms of Goddess Laxmi during worship period .These forms are Sri Gajalaxmi, Sri Adhilaxmi, Sri Vijay laxmi, Sri Aishwaryalaxmi, Sri Veerlaxmi, Sri Dhanalaxmi and Sri Santan laxmi. You must bow down towards Sri yantra.
7. व्रत के दिन सुबह से ही ‘जय माँ लक्ष्मी’, ‘जय माँ लक्ष्मी’ का स्मरण मन ही मन करना चाहिए और माँ का पूरे भाव से ध्यान करना चाहिए।
7. Chant “Jai Maa Laxmi” “Jai Maa Laxmi” whole day on fast and concentrate yourself on goddess Laxmi.
8. शुक्रवार के दिन यदि आप घर से बाहर या यात्रा पर गये हों तो वह शुक्रवार छोड़कर उनके बाद के शुक्रवार को व्रत करना चाहिए अर्थात् व्रत अपने ही घर में करना चाहिए। कुल मिलाकर जितने शुक्रवार की मन्नत ली हो, उतने शुक्रवार पूरे करने चाहिए।
8. If you are not at home or travelling on Friday then do not keep fast on that particular Friday; it means you should only keep this fast on your own home. You must complete your total days of Friday fast which you have taken oath at the time of beginning.
9. घर में सोना न हो तो चाँदी की चीज पूजा में रखनी चाहिए। अगर वह भी न हो तो सिक्का या रुपया रखना चाहिए।
9. If there is no gold at home then you can use silver utensils or ornaments for worship. If silver is also not available then keep coins for worship.
10. व्रत पूरा होने पर कम से कम सात स्त्रियों को या अपनी सामर्थ्य अनुसार जैसे 11, 21, 51 या 101 स्त्रियों को वैभवलक्ष्मी व्रत की पुस्तक कुमकुम का तिलक करके भेंट के रूप में देनी चाहिए। जितनी ज्यादा पुस्तक आप देंगे उतनी माँ लक्ष्मी की ज्यादा कृपा होगी और माँ लक्ष्मी जी के इस अद्भुत व्रत का ज्यादा प्रचार होगा।
10. You should give vaiibhav laxmi book as a gift and apply tilak to minimum seven womens or as per your capacity like 11,21,51 or 101 after completion of Vaibhav laxmi fast . It is recognized that you will get benevolence of Goddess Laxmi as much book of vaibhav laxmi you distribute. And this Vaubhav laxmi fast get publicity among universe.
11. व्रत की विधि शुरु करते वक्त ‘लक्ष्मी स्तवन’ का एक बार पाठ करना चाहिए।
11. Recite “Laxmi Stvan” before start the process of this fast.
12. व्रत के दिन हो सके तो उपवास करना चाहिए और शाम को व्रत की विधि करके माँ का प्रसाद लेकर व्रत करना चाहिए। अगर न हो सके तो फलाहार या एक बार भोजन कर के शुक्रवार का व्रत रखना चाहिए। अगर व्रतधारी का शरीर बहुत कमजोर हो तो ही दो बार भोजन ले सकते हैं। सबसे महत्व की बात यही है कि व्रतधारी माँ लक्ष्मी जी पर पूरी-पूरी श्रद्धा और भावना रखे और ‘मेरी मनोकामना माँ पूरी करेंगी ही’, ऐसा दृढ़ विश्वास रखकर व्रत करे।
12. Keep fast on the vaibhav laxmi vrat, if it is possible and take prasad in the evening after completion of worship proccedure. If it is not possible to keep fast then you can also keep vrat by having fruits or take food once in a day. If you are too weak to keep fast then you can also take food twice a day on Vaibhav Laxmi vrat. The most important thing is that the people have dedication on Goddss Laxmi and keep in mind that Goddess laxmi will fulfilled your wishes at any cost.

व्रत के लिए आवश्यक सामग्री:- (Pujan Material )

• श्री यंत्र का चित्र - • Picture of Sri Yantra
• माँ वैभव लक्ष्मी का चित्र- • Picture of Goddess Vaibhav Laxmi
• श्री धान्य लक्ष्मी का चित्र - • Picture of Sri Dhany Laxmi
• श्री गज लक्ष्मी का चित्र - • Picture of Sri Gaj Laxmi
• श्री अधिलक्ष्मी का चित्र - • Picture of Sri Adhi Laxmi
• श्री विजयलक्ष्मी का चित्र - • Picture of Sri Vijay Laxmi
• श्री ऐशवर्यलक्ष्मी का चित्र - • Picture of Sri Aishwarya Laxmi
• श्री वीर लक्ष्मी का चित्र - • Picture of Sri Veer Laxmi
• श्री धन लक्ष्मी का चित्र - • Picture of Sri Dhan Laxmi
• श्री संतान लक्ष्मी का चित्र - • Picture of Sri Santan Laxmi
• आसन ( बैठने के लिये) • Mat ( for sitting)
• चावल - • Rice
• सोना, चाँदी या रुपया - • Gld/Silver or Coin
• धूप - • Dhoop
• दीप - • Deep
• लाल फूल - • Red Flower
• चौकी या पाटा - • Woodeen Plank or stool
• लाल कपड़ा - • Red cloth
• कलश (ताम्बे का) • Kalash(Copper)
• घी - • Ghee
• कटोरी (कलश को ढ़कने के लिये) - • Bowl (To cover Kalash)
• नैवेद्य - • Sweets
• फल (केला) - • Fruit (Banana)
• हल्दी - • Turmeric
• कुमकुम - • Kumkum

पूजन विधि :

शुक्रवार के दिन सुबह स्नान करके पवित्र हो जायें और सारे दिन माँ के स्वरूप का स्मरण करें ।दिये गये सारी सामग्री एकत्रित कर लें।शाम को स्वच्छ वस्त्र पहन कर, पूजन करने वाले स्त्री या पुरुष ,पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठ जाएँ। अब चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएँ । उस पर वैभव लक्ष्मी जी के सभी आठ चित्र तथा बीच में श्री यंत्र रखें ।चौकी पर चावल का ढ़ेर रखें, उसपर जल से भरा हुआ ताम्बे का कलश रखें। कलश के उपर कटोरी में सोने या चाँदी का गहना अथवा सिक्का या रूपया रखकर कलश को ढ़क दें।
अब सर्वप्रथम “श्री यंत्र” का ध्यान करें उसके बाद “ माँ वैभव लक्ष्मी” जी के सभी आठ स्वरूपों का ध्यान कर दोनों हाथ जोड़कर दिये हुए प्रार्थना को उच्चारित करते हुए नमस्कार करें। बाद में ग्यारह या इक्कीस शुक्रवार यह व्रत करने का दृढ संकल्प माँ के सामने करें और आपकी जो मनोकामना हो वह पूरी करने को माँ लक्ष्मीजी से विनती करें।

Worship Method:

Wake up early in the morning on Friday, finish daily routine, take bath and be clean. Remember the forms of Goddess whole day in your mind. Collect all worship material. Wear clean cloth in the evening and sit down on mat, remember your face must be towards east. Now take wooden plank and cover it with red cloth. Place all eight picture and sri yantra on the wooden plank or chauki. Sri yantra must be in a ceentre of all goddess form. Put some rice on chauki and place copper kalash filled with water on the rice. Put Gold/Silver /Coin in the bowl/plate and place it over the kalash.

Now, first of all meditate towards “Sri Yantra ” and followed to all eighth form of “Maa Vaibhav Laxmi” .Bow down and chant prarthana loudly.After that make a promise to yourself in front of Maa Vaibhav Laxmi that you will keep this fast to 11 or 21 Friday .And you must request to Maa Vaibhav laxmi to fulfill your desire.