वैभव लक्ष्मी कथा क्रमश:..

समय के परिवर्तन के साथ घर में दरिद्रता और भुखमरी फैल गई। सुख से खाने के बजाय दो वक्त के भोजन के लाले पड़ गये और शीला को पति की गालियाँ खाने का वक्त आ गया था।
शीला सुशील और संस्कारी स्त्री थी। उसको पति के बर्ताव से बहुत दुख हुआ।किन्तु वह भगवान पर भरोसा करके बड़ा दिल रख कर दुख सहने लगी। कहा जाता है कि ‘सुख के पीछे दुख और दुख के पीछे सुख आता ही है। इसलिए दुख के बाद सुख आयेगा ही, ऐसी श्रद्धा के साथ शीला प्रभु भक्ति में लीन रहने लगी। इस तरह शीला असह्य दुख सहते-सहते प्रभुभक्ति में वक्त बिताने लगी। अचानक एक दिन दोपहर में उनके द्वार पर किसी ने दस्तक दी। शीला सोच में पड़ गयी कि मुझ जैसे गरीब के घर इस वक्त कौन आया होगा?

Vaibhav Laxmi Katha Continue..

Poverty and hunger came out in their house with the change of time. They were not in a condition to eat happily. Sheela faces her husband’s abuse routinely.
Sheela was gentle and cultured women. She get hurted with her husband’s behaviour. But she had a strong believe on God, So, she suffered with all problems. It is said ‘happiness comes after misery and suffering comes after happiness’ . So, she believed that her situaltion must changed. She always meditates towards God’s devotion. She survives her life with the rememberance of God. One day; suddenly someone knocked her door in noon. Sheela thought that who will come at her house?