वैभव लक्ष्मी कथा क्रमश:...

दूसरे दिन शुक्रवार था। प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहन कर शीला मन ही मन श्रद्धा और पूरे भाव से ‘जय माँ लक्ष्मी’ का मन ही मन स्मरण करने लगी। सारा दिन किसी की शिकायत नहीं की। शाम हुई तब हाथ-पांव-मुंह धो कर शीला पूर्व दिशा में मुंह करके बैठी। घर में पहले तो सोने के बहुत से गहने थे पर पति ने गलत रास्ते पर चलकर सब गिरवी रख दिये। पर नाक की कील (पुल्ली) बच गई थी। नाक की कील निकाल कर, उसे धोकर शीला ने कटोरी में रख दी। सामने पाटे पर रुमाल रख कर मुठ्ठी भर चावल का ढेर किया। उस पर तांबे का कलश पानी भरकर रखा। उसके ऊपर कील वाली कटोरी रखी। फिर विधिपूर्वक वंदन, स्तवन, पूजन वगैरह किया और घर में थोड़ी शक्कर थी, वह प्रसाद में रख कर वैभवलक्ष्मी व्रत किया।
यह प्रसाद पहले पति को खिलाया। प्रसाद खाते ही पति के स्वभाव में फर्क पड़ गया। उस दिन उसने शीला को मारा नहीं, सताया भी नहीं। शीला को बहुत आनन्द हुआ। उसके मन में वैभवलक्ष्मी व्रत के लिए श्रद्धा बढ़ गई।

Vaibhav Laxmi Katha Continue...

Next day was Friday. Sheela take bath early morning wear clean cloth and chant “Jay Maa laxmi” whole day with full devotion and dedication. She did not complain anyone. She washed hand and feet in the evening and sit down towards east . She had gold jwellery in past day but she had to keep all jwellery for mortgage due to husband’s bad habit. But,she had nose pin. She take nose-pin and keep it in bowl. Place wooden p[lank in front of her. Cover the wooden plank with handkerchieef. Place a handfull of rice on plank. Place a copper kalash filled with water on it. Keep bowl on kalash.Use some shakkar as a prasad. After that do worship with all rituala; vandan,stvan etc.
She gave some prasad to husband. Her hussband’s behaviour get changed to eat that prasad. He did not tourtured and abuse sheela on that day. Sheela get happy. Her devotion on vaibhav laxmi vrat get increased.