वैभव लक्ष्मी कथा क्रमश:...

हमारी मनोकामना पूर्ण कीजिए। हमारा सबका कल्याण कीजिए। जिसे संतान न हो उसे संतान देना। सौभाग्यशाली स्त्री का सौभाग्य अखण्ड रखना। कुंवारी लड़की को मनभावन पति देना। आपका यह चमत्कारी वैभवलक्ष्मी व्रत जो करे उसकी सब विपत्ति दूर करना। सब को सुखी करना। हे माँ! आपकी महिमा अपरम्पार है।’
माँ जी के पास से वैभवलक्ष्मी व्रत की शास्त्रीय विधि सुनकर शीला भावविभोर हो उठी। उसे लगा मानो सुख का रास्ता मिल गया। उसने आँखें बंद करके मन ही मन उसी क्षण संकल्प लिया कि, ‘हे वैभवलक्ष्मी माँ! मैं भी माँ जी के कहे अनुसार श्रद्धापूर्वक शास्त्रीय विधि से वैभवलक्ष्मी व्रत इक्कीस शुक्रवार तक करूँगी और व्रत की शास्त्रीय रीति के अनुसार उद्यापन भी करूँगी।
शीला ने संकल्प करके आँखें खोली तो सामने कोई न था। वह विस्मित हो गई कि माँ जी कहां गयी? यह माँ जी कोई दूसरा नहीं साक्षात लक्ष्मी जी ही थीं। शीला लक्ष्मी जी की भक्त थी इसलिए अपने भक्त को रास्ता दिखाने के लिए माँ लक्ष्मी देवी माँ जी का स्वरूप धारण करके शीला के पास आई थीं।

Vaibhav Laxmi Katha Continue...

Fulfilled my wish. Do welfare for us. Blessed with child to issueless couple. Gave womens intact suhag. Give suitable husband to unmarried girl. Remove all problems to thos epeople who keep this vaibhav laxmi vrat. O Maa! Your majesty is infinite. ”
Sheela get overwhelmed to heard the ritual proccedure of Maa Vaibhav Laxmi vrat By Maa ji. She feels that she achieve all hapiness. She closed her eyes and take an oath in mind that “O Vaibhav Laxmi Maa!I will also keep vaibhav laxmi vrat till twenty one Friday as per description of Maa Ji and will also do the udyapan rtually.”
Sheela opened her eyes after her promise but there were no one in front of her. She get amazed that where is Maa ji? That Maa ji was no other than actual Maa Laxmi. Shela was devotee of Laxmi Ji, So, Laxmi Maa came to saw her way in the form of Maa Ji.