वैभव लक्ष्मी कथा क्रमश:...

सौभाग्वती स्त्री का सौभाग्य अखण्ड रहता है। कुमारी लड़की को मनभावन पति मिलता है।
शीला यह सुनकर आनन्दित हो गई। फिर पूछा: ‘माँ! आपने वैभवलक्ष्मी व्रत की जो शास्त्रीय विधि बताई है, वैसे मैं अवश्य करूंगी। किन्तु उसकी उद्यापन विधि किस तरह करनी चाहिए? यह भी कृपा करके सुनाइये।’
माँ जी ने कहा: ‘ग्यारह या इक्कीस जो मन्नत मानी हो उतने शुक्रवार यह वैभवलक्ष्मी व्रत पूरी श्रद्धा और भावना से करना चाहिए। व्रत के आखिरी शुक्रवार को खीर का नैवेद्य रखो। पूजन विधि हर शुक्रवार को करते हैं वैसे ही करनी चाहिए। पूजन विधि के बाद श्रीफल फोड़ो और कम से कम सात कुंवारी या सौभाग्यशाली स्त्रियों को कुमकुम का तिलक करके ‘वैभवलक्ष्मी व्रत’ की एक-एक पुस्तक उपहार में देनी चाहिए और सब को खीर का प्रसाद देना चाहिए। फिर धनलक्ष्मी स्वरूप, वैभवलक्ष्मी स्वरूप, माँ लक्ष्मी जी की छवि को प्रणाम करें। माँ लक्ष्मी जी का यह स्वरूप वैभव देने वाला है। प्रणाम करके मन ही मन भावुकता से माँ की प्रार्थना करते वक्त कहें कि , ‘हे माँ धनलक्ष्मी! हे माँ वैभवलक्ष्मी! मैंने सच्चे हृदय से आपका व्रत पूर्ण किया है। तो हे माँ!

Vaibhav laxmi katha continue...

Women get intact suhag and unmarried girl gets suitable husband.
Sheela get pleased to heard this. And asked- “Maa! I will definitely do this vrat as per your described proccedure of worship. But how should I do the udyapan? Kindly tell me.”
Maa said- “You must completed your eleven or twenty-one Friday vrat whatever you had promisd during first day of fast. On Last Friday made kheer/pious as a prasad. Worship meethod is similar for last Friday. After completion of worship broke one coconut . Apply tilak to minimum seven unmarried girl or married (suhagan) women and give one book of ‘vaibhav laxmi vrat’ . After that offer kheer to all women. Bow down towards the form of Dhan Laxmi,Vaibhav Laxmi, Maa Laxmi. Closed your eyes and said – “O Maa Dhan Laxmi! O Maa Vaibhav Laxmi! If I had completed your vrat with full devotion and pure heart then O Maa!