श्री महालक्ष्मी पूजनं

ध्यानं – हाथ में पुष्प लेकर माँ लक्ष्मी का ध्यान करें ।
या सा पद्म आसन स्था विपुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षी।
गम्भीर आवर्त्तनाभि:स्तन भरनमिता शुभ्रवस्त्र उत्तरीया॥
या लक्ष्मी: दिव्य रूपै: मणिगणखचितै: स्नापिता हेमकुम्भै:।
सा नित्यं पद्महस्ता मम वस्तु गृहे सर्वमांगल्ययुक्ता ।।
श्री महालक्ष्म्यै नम:। ध्यानम् समर्पयामि॥
उपर लिखे हुए मंत्र का उच्चारण करें और पुष्प माँ लक्ष्मी के चरणों में छोड़ दें ।
आवाहनं- हाथ में चावल लेकर दिये गये मंत्र को पढ़ते हुए माँ के चरणों मे चावल छोड़ दें ।
ॐ सर्वलोकस्य जननीं सर्वसौख्य प्रदायिनीम्।
सर्व देवमयी ईशां देवीम् अवाहयामि अहम्॥
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। आवाहयामि॥ स्थापयामि॥
आसनं- दाएँ हाथ मे पुष्प लें और दिये गये मंत्र का उच्चारण करते हुए
ॐ तप्त कांचन वर्णाभं मुक्तामणि विराजितम्।
अमलं कमलं दिव्यम् आसनं प्रतिगृहृताम्।
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। आसनं समर्पयामि ॥
पुष्प महालक्ष्मी पर छोड़ दें ।
पाद्यं-पंचपात्र में से एक चम्मच जल लेकर मंत्र का उच्चारण करें -
ॐ गंगादितीर्थं संभूतं गंधपुष्पादिभि:युतम्।
पाद्यं ददामिअहं देवि गृहाण आशु नमोऽस्तुते॥
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। पादयोर्पाद्यम् समर्पयामि ॥
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। पाद्यम् समर्पयामि ॥
और यह जल मूर्ति के आगे या माँ लक्ष्मी के चित्र को दिखा कर चांदी के सिक्के पर (चरण धोने के लिए) समर्पित करें ।
अर्घ्यं- एक अर्घा में गंध,अक्षत,पुष्प लेकर दिये हुए मंत्र को बोलते हुए -
ॐ अष्ट्गंध समायुक्तं स्वर्ण पात्र प्रपूरितम्।
अर्घ्यं गृहाण मत्द तं महालक्ष्म्यै नमोऽस्तुते ॥
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। हस्तयो: अर्घ्यम् समर्पयामि ॥
अर्घ्य मूर्ति के आगे अथवा माँ के चित्र को दिखा कर चांदी के सिक्के पर समर्पित करें ।
आचमनं- चम्मच में थोड़ा जल लेकर दिये हुए मंत्र को बोलते हुए -
ॐ सर्वलोकस्य या शक्ति: ब्रह्म
विष्णु: आदिभि: स्तुता।ददामि आचमनं तस्यै
महालक्ष्म्यै मनोहरम्।
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। आचमनीयं जलं समर्पयामि ॥
यह जल माँ के चरणों मे छोड़ दें ।
स्नानं- लक्ष्मी की मूर्ति को या चित्र को अथवा चांदी के सिक्के को गंगाजल से स्नान करवाएं। एक पात्र में जल लेकर दिये हुए मंत्र को बोलते हुए -
ॐ मन्दाकिन्या: समानीतै: हेम अम्भोरूह वासितै:
स्नानं कुरुष्व देवेशि सलिलै:च सुगंधिभि:॥
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। स्नानं समर्पयामि ॥
जलं समर्पयामि॥
स्नान के लिये महालक्ष्मी को जल समर्पित करें।फिर आचमन के लिये पुन: जल समर्पित करें ।
पंचामृत स्नानं- एक पात्र में दूध,दही,घी,शहद,शर्करा(शक्कर) मिलाकर पंचामृत बनायें। अब इस पंचामृत को चम्मच में लेकर माँ लक्ष्मी को स्नान करायें और साथ मे मंत्र का उच्चारण करें ।
पयो दधि घृतं चैव मधुशर्करा अन्वितम्।
पंचामृतं मयानीतं स्नानार्थं प्रतिगृहृताम ।
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। पंचामृत स्नानं समर्पयामि ॥
शुद्धोदक-स्नान – अब शुद्ध जल लेकर दिये हुए मंत्र को बोलते हुए -
ॐ तोयं तव महादेवि। कर्पूर अगरूवासितम्।
तीर्थेभ्य: सुसमानीतं स्नानार्थं भक्तवत्सले॥
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। शुद्धौदक स्नानं समर्पयामि ॥
शुद्ध जल से स्नान करायें ।
वस्त्रं- वस्त्र (वस्त्र ना हो तो मौली तोड़कर) हाथ में ले तथा मंत्र पढ़ते हुए -
ॐ दिव्याम्बरं नूतनं हि क्षौमं तु अति मनोहरम्।
दीयमानं मया देवि गृहाण जगदम्बिके॥
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। वस्त्रं समर्पयामि ॥
आचमनीयं जलं समर्पयामि ॥
वस्त्र समर्पित करें ।आचमन के लिये जल समर्पित करें ।
उपवस्त्रं- मौली तोड़कर हाथ में ले तथा मंत्र बोलते हुए माँ को उपवस्त्र समर्पित करें ।
कंचुकीउपवस्त्रं चा नानारत्नै: समन्वितम्।
गृहाण त्वं मया दत्तं मंगले जगत् ईश्वरि॥
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। उपवस्त्रं समर्पयामि ॥
आचमनीयं जलं समर्पयामि ॥
आचमन के लिये जल समर्पित करें ।

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