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गंधं- एक पात्र में केसर वाला चंदन लें ।
श्रीखण्डागुरु कर्पूर मृगनाभि समन्वितम्।
विलेपनं गृहाण आशु नमोऽस्तु भक्त वत्सले ॥
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। गंधं समर्पयामि ॥
अनामिका अंगुली (दाएं हाथ की छोटी अंगुली के साथ वाली अंगुली ) से केसर वाला चंदन अर्पित करें ।

सिंदूरं- हाथ मे सिंदूर की डिब्बी लें ।
ॐ सिंदूरं रक्तवर्णं च सिंदूर तिलकप्रिये ।
भक्त्यार दत्तं मया देवि सिंदूरं प्रतिगृहृताम्।
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। सिंदूरं समर्पयामि ॥
सिंदूर समर्पित करें ।

कुंकुमं-एक पात्र में कुंकुम (गुलाल) लें ।
ॐ कुंकुमं कामदं दिव्यं कुंकुमं कामरूपिणम्॥
अखण्डकाम सौभाग्यं कुंकुमं प्रतिगृहृताम
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। कुंकुमं समर्पयामि ॥
महालक्ष्मी को कुंकुम समर्पित करें ।

अक्षतं-हाथ में साबुत चावल लें,थोड़ा चंदन मिलाएं।
ॐ अक्षतान् निर्मलान् शुभ्रान् मुक्तामणि समन्वितान् ।
गृहाण इमांमहादेवि ! देहि मे निर्मलां धियम्।
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। अक्षतान् समर्पयामि ॥
अक्षत समर्पित करें ।

पुष्पं- पुष्प हाथ में लें ।
ॐ मन्दार पारिजाता द्या: पाटली केतकी तथा।
मरूवा मोगरं चैव गृहाण आशु नमो नम:॥
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। पुष्पं समर्पयामि ॥
पुष्प खड़े होकर समर्पित करना चाहिये । सम्भव हो तो लाल कमल का पुष्प समर्पित करें।लाल कमल माँ लक्ष्मी को अधिक प्रिय है।

पुष्पमाला – दोनों हाथं में पुष्पमाला लें ।
ॐ पद्म शंख जवापुष्पै: शतपत्रै:विचित्रिताम्।
पुष्पमालां प्रयच्छामि गृहाण त्वं सुरेश्वरि
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। पुष्पमालां समर्पयामि ॥
सम्भव हो तो देवी को लाल कमल से बनी हुई पुष्पमाला समर्पित करें।

दूर्वादलं (दूब की गुच्छी)-
ॐ विष्णु आदि सर्वदेवानां प्रियां सर्वसुशोभनाम्।
क्षीरसागर सम्भूते दूर्वा स्वीकुरू सर्वदा॥
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। दूर्वाङ्कुंरान् समर्पयामि ॥
महालक्ष्मी को दूब समर्पित करें।

अतर (इत्र)-इत्र की शीशी लें ।
ॐ स्नेहं गृहाण स्नेहेन लोकेश्वरि ! दयानिधे! ।
सर्वलोकस्य जननि ! ददामि स्नेहम् उत्तमम्।
ॐ महालक्ष्म्यै नम:। सुगंधिद्रव्यम् समर्पयामि ॥ अब माँ को इत्र समर्पित करें।

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