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गौरी-ग़णेश स्मरण: -

दाएँ हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर लिखे हुए मंत्र पढें और माता गौरी और गणेश जी का ध्यान करें:-
गजाननं भूतगणादि सेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम् ॥
शुक्लाम्बर धरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्व विघ्न उपशान्तये ॥
अभीप्सित अर्थ सिध्यर्थं पूजितो य: सुरासुरै:।
सर्वविघ्नहर:तस्मै गणाधिपतये नम:॥
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
अक्षत एवं पुष्प गणेशम्बिका पर समर्पित करें।

सभी देवताओं- गौरी,गणेश,विष्णु इत्यादि को नमस्कार :-

हाथ मे अक्षत लेकर नाम के साथ थोड़-थोड़ा अक्षत छोड़ें ।
ॐ सर्वेभ्योदेवेभ्यो नम: (अक्षत छोड़ें)
ॐ सर्वेभ्यो ब्राह्मणेभ्यो नम: (अक्षत छोड़ें)
ॐ मातृ-पितृ चरणकमलेभ्यो नम: (अक्षत छोड़ें)
ॐ एतत् कर्मप्रधानदेवता महालक्ष्म्यै नम: (अक्षत छोड़ें)
॥ इति नमस्कृत्य ॥

संकल्प

अर्घा/पात्र या दाएं हाथ में जल,पुष्प,अक्षत,गंध,द्रव्य(सिक्का/रूपया),पान का पत्ता,सुपारी लेकर दिये हुए मंत्र से संकल्प करें ।
ॐ विष्णवे नम:, ॐ विष्णवे नम:, ॐ विष्णवे नम:, ...... (अपने क्षेत्र/शहर/मुहल्ला/मकान संख्या उच्चारण करें) क्षेत्रे मसोत्तमे मासे कार्तिक मासे कृष्ण पक्षे शुभ तिथौ अमावस्यायां दीपावली पुण्य पर्वणि ( वार का नाम /जिस वार को दीपावली हो ) .... वासरे शुभ पुण्यतिथौ (अपने गोत्र का नाम ) .... गोत्र: (अपना नाम ) ..... नामे Sहं( या फिर जिस कुल से हो जैसे- वर्मा- वर्मणोSहम्, गुप्त-गुप्तोSहम्,) मम सकुटुम्बस्य सपरिवारस्य दीर्घायु: आरोग्यै: ऐश्वर्य आदि वृद्धि अर्थ पुत्र-पौत्रादि सुख प्राप्ति अर्थ आदित्य आदि नवग्रह अनुकूलता सिद्धि अर्थ व्यापार अभिवृद्धि अर्थ, स्थिर लक्ष्मी-प्राप्ति श्रीमहालक्ष्मीप्रीत्यर्थ महालक्षमीपूजनं कुबेरादीनां च अर्थं सर्व अभीष्ट फलाप्राप्ति धर्मार्थकाममोक्ष चतुर्विध पुरुषार्थसिद्धि प्राप्ति अर्थं श्रीमहालक्ष्मी, तद् अंगत्वेन निर्विघ्न अर्थं गणपति आदि देवानां पू‍‍‍‍‍‍जनञ्च करिष्ये।
अब सभी वस्तुओं को भूमि पर छोड़ दें ।

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