卐 ॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥ 卐

आचमन विधि :-

पुष्प या चम्मच से दाएँ हाथ में जल लें। अब “ॐ केशवाय नमः” मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पी लें।
फिर पुष्प या चम्मच से दाएँ हाथ में जल लें। अब “ॐ नारायणाय नमः” मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पी लें।
फिर पुष्प या चम्मच से दाएँ हाथ में जल लें। अब “ॐ वासुदेवाय नमः” मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पी लें।
फिर “ॐ हृषिकेशाय नमः” कहते हुए दाएँ हाथ के अंगूठे के मूल से होंठों को दो बार पोंछकर हाथों को धो लें।

पृथ्वी पूजन

अपने दाएँ हाथ मे पुन: थोड़ा जल लेकर लिखे हुए मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पृथ्वी पर छिड़कें तथा पृथ्वी पर सफेद और लाल,चंदन,पुष्प व चावल छोड़ें ।
ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु च आसनम्‌॥

दीपक पूजन

अब दीपक प्रज्जवलित कर पुष्प हाथ में लेकर दीपक का ध्यान करते हुए दीप पूजन मंत्र का उच्चारण करें तथा पुष्प दीपक के पास छोड़े ।
भो दीप देवरूप: त्वं कर्मसाक्षी हि अविघ्नकृत्।
यावत् कर्म समाप्ति: स्यात् तावत् अत्र स्थिरोभव ॥

गुरु वंदना

गुरु का चित्र (गुरु न हो तो महालक्ष्मी को ही गुरु माने) चौकी पर दाएँ हाथ की ओर स्थापित करें।सर्वप्रथम गुरु के चित्र को गीले वस्त्र से पोंछे, उसके बाद रोली,धूप-दीप,चंदन,पुष्पादि चढ़ायें। फिर दोनों हाथ जोड़कर प्रार्थना करें। गुरु: ब्रह्मा गुरु: विष्णु: गुरु: देवो महेश्वर:।
गुरु: साक्षात्परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नम:।।
अखण्ड मण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् ।
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः ।।
ॐ गुरुवे नम:। ॐ परम गुरुवे नम:।
ॐ परातार गुरुवे नम:। ॐ परमेश्टी गुरुवे नम:।
ॐ गुरु पंक्ते नम:।

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