卐 ॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥ 卐

दूसरी चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर रखकर सामने वाली चौकी के दायीं ओर रखें( लक्ष्मी की मूर्ति सदैव गणेश जी के दाहिनें ओर स्थापित की जाती है)। चाँदी के सिक्के को स्थापित करने के लिये एक लाल चावल की ढेरी या अष्टदल (आठ दल / खाने) बनाकर रख सकते हैं। सामने वाली चौकी के बायीं ओर अर्थात् ईशानकोण (उत्तर-पूर्व) में चावल से अष्टदल (आठ दल / खाने) बनाकर, जल से पूर्ण कलश रखें। कलश में दुर्बा, गंगाजल, सुपारी, हल्दीगांठ, द्र्व्य(सिक्का) डालें। उसमें आम का पल्लव(पत्ता) डालें। कलश में कलावा बांधे। पुन: उसके ऊपर चावल से भरा पात्र रखें। पात्र पर, लाल वस्त्र में लपेट कर या कलावा बांधकर नारियल रखें। कलश पर स्वास्तिक/सतिया बना दें। तस्वीर अथवा मूर्तियों के बाईं ओर (अर्थत् पूजक के दाईं ओर) तेल का दीपक, धूपबत्ती तथा दाईं ओर घी का दीपक रखें। प्रसाद, वस्त्र, फल, मिठाई, खील, बतासे, दीपक, भेंट सामग्री इत्यादी सामने की ओर रखें।

Take second wooden stool/plank or plate and layer it with red cloth.Place the second stool or plate at right side of first stool/plate. Place new statue of Shree Ganesh and Laxmi Jee on second plate/stool. (remember always place Laxmi Jee at right side of Shree Ganesh) .Draw eighth petal lotus flower with red color rice and place silver coin on it.Make one more eighth petal lotus flower with red color rice at north east corner or left side of first stool and place finial filled with pure water .Put some grass, holy water(ganga Jal), one areca nut,whole turmeric,some coins in finial.Place Mango leaves in the finial/kalash.Tied the mauli on the neck of finial.Place lid or plate(filled with rice) on the finial to cover it.Cover whole coconut with red cloth and place it over the finial/kalash.Draw swastika on the kalash/finial.Place oil lamp & dhoop at left side of statue(right side of worshipper) and ghee lamp at right side of statue(left side of worshipper) . Keep all Prasad (sweets), clothes, fruit, Bataase, Lamp, offering material etc in front of worshipper.

पवित्रीकरण करें

पंच-पात्र में से फूल अथवा चम्मच द्वारा थोड़ा जल अपने बाएं हाथ मे लेकर दाएं हाथ की चारों अंगुलियों से पूजा की सारी सामग्री व उपस्थित सभी व्यक्तियों पर जल छिड़कते हुए लिखे हुए मंत्र का उच्चारण कर,सभी सामग्री और उपस्थित जन-समूह के साथ अपने आप को पवित्र कर लें।
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्व अवस्थांगत: अपिवा।
यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्य अभ्यन्तर: शुचिः॥
ॐ पुण्डरीकाक्ष: पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्ष: पुनातु,
ॐ पुण्डरीकाक्ष: पुनातु।

Purification (Pavitrikaran):-

Take some water from glass/water pot by flower or spoon in right hand. Sprinkle water drops on all the available materials, people and self through four fingers of right hand and chant sanctification mantra. It is purification method.
Om Apavitrah Pavitro Va Sarv Avasthaangatah Apiva|
Yah Smaret Pundarikaaxan Sa Vaahy Abhyantarah Shuchih
Om Pundarikaaxah Punaatu Om Pundarikaaxah Punaatu
Om Pundarikaaxah Punaatu

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