मंत्र-पुष्पाञजलि
दोनों हाथों की अंजली में पुष्प भर कर ,हाथ जोड़ कर, दिये हुए मंत्र से ,पुष्प श्री महालक्ष्मी को समर्पित करें ।
ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च
धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।
ॐ महालक्ष्म्यै नम: ,मंत्र पुष्पाञ्जलिं समर्पयामि ।
हाथ में लिए फूल महलक्ष्मी को अर्पित करें ।
प्रदक्षिणां – हाथों में पुष्प लेकर हाथ जोड़ें –
यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च ।
तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिण पदे पदे ॥
ॐ महालक्ष्म्यै नम: ,प्रदक्षिणां समर्पयामि ।
एक प्रदक्षिणा करें । पुष्प महालक्ष्मी को समर्पित करें ।
विसर्जनं- हाथ में अक्षत लेकर मंत्र पढ़े :-
यान्तु देवग़णा: सर्वे पूजाम् आदाय मामकीम्।
इष्ट कामसमृद्धि अर्थं पुन:आगमनाय च ॥
गणेश-लक्ष्मी जी की मूर्तियों को छोड़कर,आवाहित एवं स्थापित सभी देवी- देवताओं पर अक्षत एवं पुष्प समर्पित करें ।
॥ इति श्रीमहालक्ष्मी षोडशोपचार पूजनम्॥
॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ।।
महालक्ष्मी जी से क्षमा प्रार्थना के लिए –
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि ॥
मन्त्रहीन क्रियाहींन भक्तिहीनं सुरेश्वरि ।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥
त्वमेव माता च पिता त्वमेव ।
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ॥
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव ।
त्वमेव सर्वं मम देवदेव्॥

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