प्रधान आरती:- एक थाली में स्वास्तिक चिन्ह बनाकर अक्षत तथा पुष्प बिछा कर विषम संख्या में बत्ती तथा किसी पात्र में कपूर प्रज्वलित कर आरती-थाल का जल से प्रोक्षण कर आसन पर खड़े होकर सपरिवार, घण्ट-नाद (बजाते) करते हुए श्री महालक्ष्मी जी की आरती करें

श्री लक्ष्मी जी की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु धाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं, तहँ सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

आरती के बाद हथेली में थोड़ा जल लेकर आरती की थाली के चारों ओर घुमाकर उपस्थित व्यक्तियों पर हथेली का जल छिड़क दें।तत्पश्चात् सभी देवों को आरती दें। अब तीन बार दोनों हाथों से आरती की ज्योती को छू कर अपने सिर पर आशीष के रूप में लगायें ।

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