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अथ दीपमालिका (दीपक) पूजनम्:-
किसी थाली या परात में 11,21,31,51 या इससे अधिक दीपकों को प्रज्वलित कर महालक्ष्मी के पास रखें तथा “ॐ दीपावल्यै नम:” इस नाम-मंत्र से गंधादि(गंध,चावल,पुष्प) द्वारा दीप ज्योति का पूजन कर प्रार्थना करें ।

प्रार्थना-
भो दीप त्वं ब्रहरूप हि अन्धकार निवारक ।
इमां मया कृतां गृहण् तेज: प्रवर्धय ॥

अपने कुलाचार (कुल-परम्परा) के अनुसार रंगोली बनाएं,धान का लावा(खील) ,फल,ईख,पानीफल इत्यादि पदार्थ दीपज्योति,गणेश,महालक्ष्मी तथा आवाहित सभी देवी-देवताओं को समर्पित करें। अंत में सभी प्रज्वलित दीपकों को सम्पूर्ण गृह में रखें। दीपक इस प्रकार रखें की घर का प्रत्येक कोना रोशन हो ।
॥इति दीपमालिका पूजनम्॥



गणेश आरती:- एक थाली में स्वास्तिक चिन्ह बनाकर अक्षत तथा पुष्प बिछा कर विषम संख्या में बत्ती तथा किसी पात्र में कपूर प्रज्वलित कर आसन पर खड़े होकर सपरिवार, घण्ट-नाद (बजाते) करते हुए सर्वप्रथम गणेश जी की आरती करें :-

श्री गणेश जी की आरती
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी ।
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी ॥
॥ जय गणेश, जय गणेश, .. ॥
पान चढ़ें, फूल चढ़ें और चढ़ें मेवा ।
लडुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
॥ जय गणेश, जय गणेश, .. ॥
अंधें को आँख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
॥ जय गणेश, जय गणेश, .. ॥
दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी
कामना को पूरा करो, जग बलिहारी॥
॥ जय गणेश, जय गणेश, .. ॥
जय गणेश,जय गणेश,जय गणेश देवा
सूरश्याम शरण आये, सफल किजै सेवा॥
॥ जय गणेश, जय गणेश, .. ॥

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