व्यापारी वर्ग के लिए
अथ श्री महाकाली (दवात) पूजनम्
श्री हनुमान जी के सिंदूर मे देशी घी मिलाकर घोल बनाएं। स्याही से भरी दवात को माँ महालक्ष्मी के सामने पुष्प तथा अक्षत पुंज पर रखकर, घोल से स्वास्तिक 卐 बनाएं । मौली बाँध दें । पुष्प हाथ में ले कर ध्यान करें । ध्यान –
कालिके! त्वं जगन्मात:मषिरूपेण वर्तसे।
उत्पन्ना त्वं च लोकानां व्यवहारप्रसिद्धये ॥
पुष्प दवात पर छोड़ दें ।
॥ इति श्री महाकाली पूजनम्॥
अथ लेखनी पूजनम्
कलम (पैन) पर मौली बाँध कर सामने रख लें,फिर दिये हुए मंत्र से ध्यान करें ।
ध्यान –
शुक्लां ब्रह्मविचारसार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीं।
वीणा पुस्तक धारिणीम्अभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्म आसने संस्थितां।
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥
“ ॐ लेखन्यै देव्यै नम:” इस मंत्र को उच्चारण करते हुए गंध,पुष्प,अक्षत आदि से कलम की पूजा करें ,फिर (दाएं) हाथ में चावल व पुष्प लेकर प्रार्थना करें व चावल को लेखनी पर समर्पित करें ।
॥ इति लेखनी पूजनम्॥
अथ सरस्वती (पञिजक- बही खाता) पूजनम्
प्रार्थना- हाथ में पुष्प लें। सरस्वत्यै नम: कहकर और दिये हुए मंत्र को बोलते हुए ,पुष्प बही-खाते पर छोड़ दें।
ॐ शारदा शारदाम्भोजवदना वदनाम्बुजे।
सर्वदा सर्वदाअस्माकं सान्निधिं सन्निधिं क्रियात्।
वीणापुस्तकधारिण्यै श्रीसरस्वत्यै नम:।
॥ इति पञ्जिका पूजनम्।।
अथ कुबेर पूजनम्
प्रार्थना- हाथ में चावल और फूल लेकर प्रार्थना करें और चावल तथा पुष्प तिजोरी में छोड़ें ।
धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्म अधिपाय च ।
भगवन् त्वत् प्रसादेन धनधान्य आदिसम्पद:॥
प्रार्थना कर पूर्वपूजित हल्दी,धनिया,कमलगट्टा,द्रव्य,दूर्वादि से युक्त थैली तिजोरी में रखें
॥ इति कुबेर पूजनम्॥
तुला तथा मानपूजनम्
सिंदूर से तराजू आदि पर स्वास्तिक बना लें।गंध,अक्षत ,पुष्प लेकर ध्यान करें-
नमस्ते सर्व देवानां शक्तित्वे सत्य माश्रिता।
साक्षीभूता जगद्धात्री निर्मिता विश्व योनिना॥
ओम् तुला अधिष्ठातृ देवतायै नम:
कहकर पुष्पादि तराजूआदि पर छोड़ दें।
॥ इति तुला तथा मानपूजनम्||

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