वैभव लक्ष्मी कथा क्रमश:..

‘बेटी! वैभवलक्ष्मी व्रत वैसे तो सीधा-सादा व्रत है। किन्तु कई लोग यह व्रत गलत तरीके से करते हैं, अतः उसका फल नहीं मिलता। कई लोग कहते हैं कि सोने के गहने की हलदी-कुमकुम से पूजा करो बस व्रत हो गया। पर ऐसा नहीं है। कोई भी व्रत शास्त्रीय विधि से करना चाहिए। तभी उसका फल मिलता है। सच्ची बात यह है कि सोने के गहनों का विधि से पूजन करना चाहिए। व्रत की उद्यापन विधि भी शास्त्रीय विधि से करना चाहिए। यह व्रत शुक्रवार को करना चाहिए। प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनो और सारा दिन ‘जय माँ लक्ष्मी’ का स्मरण करते रहो। किसी की शिकायत नहीं करनी चाहिए। शाम को पूर्व दिशा में मुँह करके आसन पर बैठ जाओ। सामने पाटा रखकर उस पर रुमाल रखो। रुमाल पर चावल का छोटा सा ढेर करो। उस ढेर पर पानी से भरा तांबे का कलश रख कर, कलश पर एक कटोरी रखो। उस कटोरी में एक सोने का गहना रखो। सोने का न हो तो चांदी का भी चलेगा। चांदी का न हो तो नकद रुपया भी चलेगा। बाद में घी का दीपक जला कर धूप सुलगा कर रखो।

Vaibhav Laxmi katha continue...

“Daughter! Well, Vaiubhav laxmi vrat is very simple. But, some people do this in wrong way, So, they did not get result. Some people said that to worship gold ornaments with turmeric-kumkum is vrat. But ,It is not true. Every Vrat shuold keep with ritually. Then you get result. Truth is that to worship gold ornament with full ritual process. Udyapan of this vrat should also do with ritual method. you should do this fast on Friday. Take bath early in the morning wear clean cloth and chant “Jai Maa Laxmi” whole day. Should not complaint anyone. You sat down on the mat in the evening. Your face should be towards east. Keep a plank in front of yourself and cover it with handkerchief. Keep some rice on the handkerchief. Place a copper kalash filled with water on it. Keep one bowl on the kalash. Put a golden ornament in the bowl. If gold iss not available then keep silver. If silver is also not available then keep coin . Keep ghee deepak and dhoop.”