एक बुढ़िया उसके सात बेटे और एक बेटी की प्रचलित कहानी

साँप बोला- मैं तुम्हारा काल हूँ। और मुझे तुमको डसना है।
भाई बोला- मेरी बहन मेरा इंतजार कर रही है। मैं जब तिलक करा के वापस लौटूँगा, तब तुम मुझे डस लेना।
साँप ने कहा- भला आज तक कोई अपनी मौत के लिए लौट के आया है, जो तुम आओगे।
भाई ने कहा- अगर तुम्हें यकीन नहीं है तो तू मेरे झोले में बैठ जा। जब मैं अपनी बहन के तिलक कर लू तब तुम मुझे डस लेना। साँप ने ऐसा ही किया।
भाई बहन के घर पहुँच गया। दोनो बड़े खुश हुए।
भाई बोला- बहन, जल्दी से खाना दे, बड़ी भूख लगी है।
बहन क्या करे। न तो दूध की रसोई सूखे, न ही घी में चावल पके।
भाई ने पूछा- बहन इतनी देर क्यूँ लग रही है? तुम क्या पका रही है?
तब बहन ने बताया कि मैंने ऐसे ऐसे किया है।
भाई बोला- पगली! कहीं घी में भी चावल पके हैं , या दूध से कोई रसोई लीपे है। गोबर से रसोई लीप, दूध में चावल पका।