सोमवती अमावस्या उद्यापन विधि - Somvati Amavasya Udyapan Vidhi Page 1/8

सोमवती अमावस्या का उद्यापन १२ वर्षों तक व्रत करने के पश्चात् अथवा मध्य में (अर्थात् 6 वर्ष के पश्चात्) अथवा प्रारम्भ में करना चाहिये। इस व्रत के प्रभाव से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं । इस व्रत से पुत्र पौत्रादि के साथ परम सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

सोमवती अमावस्या उद्यापन विधि पूजन सामग्री

∗ कलश (मिट्टी या किसी धातु का सामर्थ्यानुसार) -१ ∗ पांच रत्न (माणिक, मोती, पन्ना, हीरा , हीरा और नीलम) की वेदी ∗ पीपल का वृक्ष (स्वर्ण का) - १ ∗ लक्ष्मी और वाहन (गरुड़) सहित विष्णु भगवान की स्वर्ण निर्मित मूर्ति -१ ∗ वस्त्र- २ (१.२५ मीटर का – एक पीला और एक लाल ) ∗ यज्ञोपवीत- १ जोड़ा ∗ पुष्प ∗ तुलसी ∗ पुष्पमाला ∗ अक्षत (साबुत चावल को साथ बार धोकर अच्छे से सुखा लें) ∗ चंदन ∗ दीपक ∗ रूई की बत्ती ∗ माचिस ∗ घी ∗ धूप ∗ रोली ∗ नैवेद्य ∗ ऋतुफल ∗ नारियल ∗ कच्चा धागा (परिक्रमा के लिये) ∗ सिंदूर ∗ गंगाजल ∗ आरती के लिये थाली ∗ आचमनी ∗ लोटा/जलपात्र ∗ दोना या कटोरी( नैवेद्य के लिये) ∗ आसन ∗ पान का पत्ता (डण्डी सहित) ∗ साबुत सुपारी ∗ साबुत हल्दी ∗ दूर्बा ∗ पंचामृत (कच्चा गाय का दूध,दही, घी, शक्कर एवं शहद को मिलाकर पंचामृत बनायें) ∗ चूड़ी/ बिंदी/सुपारी/पान के पत्ते/मूंगफली – 108 की संख्या में ( जिससे परिक्रमा आसानी से पूरी हो जाये)

सर्वतोभद्र मंडल बनाने के लिये:-

∗ हरा चावल- ७५० ग्राम (चावल को हरे रंग से रंग लें) ∗ पीला चावल- २५० ग्राम (चावल को पीले रंग या हल्दी से रंग लें) ∗ लाल चावल- २५० ग्राम(चावल को लाल रंग से रंग लें) ∗ काला चावल- २५० ग्राम(चावल को काले रंग से रंग लें) ∗ सफेद चावल- ७५० ग्राम

हवन के लिये:-

∗ हवन सामग्री ∗ हवन कुण्ड ∗ आम की लकड़ी- १.२५ किलो ∗ खीर

ब्राह्मण भोज के लिये:-

∗ मालपुए ∗ खीर ∗ अन्य खाद्य पदार्थ

सोमवती अमावस्या उद्यापन विधि

साधक प्रात:काल उठकर नित्य क्र्म से निवृत हो स्नानादि कर लें । स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। पूजा स्थल या पूजा गृह को साफ कर गंगाजल से पवित्र कर लें। सभी सामग्री एकत्र कर लें। आसन पर बैठ जाये। अलग-अलग रंग के चावल से निम्न चित्र की सहायता से सर्वतोभद्र मण्डल बनायें।

somvati amavasya udyapan vidhi

सफेद स्थान : सफेद चावल
हरा स्थान : हरे रंग का चावल
लाल स्थान : लाल रंग का चावल
पीला स्थान : पीले रंग का चावल
काला स्थान : काले रंग का चावल

कलश में जल भर लें । उसमें थोड़ा गंगाजल, दूर्बा, साबुत हल्दी और सिक्के डालें। कलश को सर्वतोभद्र मण्डल के बीच में स्थापित करें। लाल वस्त्र में नारियल लपेट कर कलश के ऊपर रखें । पांच रत्न की वेदी बनायें । ये पांच रत्न पंच तत्व के प्रतीक हैं। माणिक (अग्नि), मोती (जल), पन्ना (पृथ्वी), हीरा (वायु) एवं नीलम (आकाश) का प्रतीक है। वेदी पर स्वर्ण के अश्वत्थ वृक्ष को स्थापित करें। अश्वत्थ वृक्ष के मूल में माता लक्ष्मी और गरुड़ सहित विष्णु भगवान की मूर्ति स्थापित करें। आसन पर पूर्व मुख करके बैठ जायें।