सफला एकादशी व्रत विधि एवं कथा - safala Ekadashi Vrat Vidhi and Katha in Hindi

पौष मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी कहते हैं। यह व्रत इस वर्ष, २०१७ में १३ दिसम्बर (बुधवार) को [ 13 December (Wednesday) 2017] है। इस व्रत श्रीविष्णु भगवान की पूजा का विधान है।।

सफला एकादशी व्रत महात्म्य:- (Importance of safala Ekadashi)

इस व्रत को करने से सहस्त्र वर्ष के तपस्या से प्राप्त फल के समान पुण्य मिलता है। यह व्रत रात्रि भर जागरण तथा भगवत कीर्तन के साथ विधिपूर्वक करने से मनुष्य के जन्मों के पाप का नाश होता है एवं अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है। इस व्रत के करने जो पुण्य प्राप्त होता है वह कुरुक्षेत्र तीर्थ में सुर्य ग्रहण के समय स्नान करने से भी प्राप्त नहीं होता। मनुष्य इस व्रत को करके सभी मनवांछित कामानाओं को पाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सफला एकादशी व्रत पूजन सामग्री:- (Puja Saamagree for safala Ekadashi Vrat)

∗ श्री विष्णु जी का चित्र अथवा मूर्ति
∗ पुष्प
∗ पुष्पमाला
∗ नारियल
∗ सुपारी
∗ बिजौरा नींबू
∗ जमीरा नींबू
∗ अनार,
∗ आँवला,
∗ लौंग
∗ बेर
∗ अन्य ऋतुफल
∗ धूप
∗ दीप
∗ घी
∗ पंचामृत (दूध(कच्चा दूध),दही,घी,शहद और शक्कर का मिश्रण)
∗ अक्षत
∗ तुलसी दल
∗ चंदन- लाल
∗ मिष्ठान

सफला एकादशी व्रत की विधि (Puja Method Of safala Ekadashi)

इस व्रत को करने के लिये भक्तों को एक दिन पूर्व से हीं नियम करना होता है। दशमी तिथि को सात्विक भोजन करें । भक्तजन प्रात:काल उठकर नित्यक्रम से निवृत होकर पूजा करें । उसके बाद हीं भोजन ग्रहण करें। भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिये। भोजन में लहसुन, प्याज आदि प्रयोग ना करें। रात्रि को एक हीं बार भोजन करें। अब एकादशी तिथि को सुबह उठकर अपने नित्य कार्यों से निवृत हो जायें। स्नान कर सवच्छ वस्त्र धारण करं । पूजा गृह अथवा पूजा स्थल को शुद्ध कर लें। सभी पूजन सामग्री इकट्ठा कर लें। व्रत का संकल्प करें। अब श्रीविष्णु भगवान की पूजा करें। धूप-दीप अर्पित कर भोग लगायें। सफला एकादशी की कथा सुने अथवा सुनायें। कथा सम्पूर्ण होने पर श्रीविष्णु जी की आरती करें । उपस्थित जनों में प्रसाद वितरित करें। सारे दिन श्रीविष्णु भगवान का नाम जपें। सुर्यास्त के बाद केवल फल ग्रहण करें। नमक का सेवन ना करें। सारी रात भगवान का कीर्तन एवं जागरण करें । अगली सुबह उठकर नित्य क्रम कर , स्नान करें एवं श्रीविष्णु जी का पूजन करें। ब्राह्मणों को दान दें। तत्पश्चात् भोजन ग्रहण करें।