कजरी नवमी

श्रावण की पूर्णिमा को कजरी पूर्णिमा कहते हैं। इसी को श्रावणी पूर्णिमा भी कहते हैं। इसी दिन श्रावणी-कर्म होता है और रक्षा-बन्धन भी होता है। श्रावणी पूर्णिमा को संध्या के समय कजरी का जुलूस निकलता है। पूर्णिमा के एक सप्ताह पहले यानी श्रावण शुक्ल पक्ष की नवमी को कजरी (गेहूँ या जौ) बोते हैं। कजरी (गेहूँ या जौ) को पानी में फुलाकर दोने में बो देते हैं और उसे ऐसी जगह रखते हैं जहाँ हवा न लगने पाये। हवा न लगने से कजरी का रंग पीला हो जाता है। सात दिन तक बराबर संध्या को इसकी पूजा करते हैं। जिस नवमी को कजरी बोई जाती है, उसे कजरी की नवमी कहते हैं। यानी श्रावणी शुक्ला नवमी को कजरी बोई जाती है। कजरी नवमी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मनाया जाता है।