सोलह सोमवार व्रत पूजा सामग्री

शिव जी की मूर्ति
भांग,
बेलपत्र,
जल,
धूप,
दीप,
गंगाजल,
धतूरा,
इत्र,
सफेद चंदन,
रोली,
अष्टगंध,
सफेद वस्त्र
नैवेद्य( आधा सेर गेहूं का आटा को घी में भून कर गुड़ मिला कर अंगा बना लें)

सोलह सोमवार व्रत पूजा विधि:-

सोमवार के दिन प्रात:काल उठकर नित्य-क्रम कर स्नान कर लें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा गृह को स्वच्छ कर शुद्ध कर लें। सभी सामग्री एकत्रित कर लें। शिव भगवान की प्रतिमा के सामने आसन पर बैठ जायें।

संकल्प :-

किसी भी पूजा या व्रत को आरम्भ करने के लिये सर्व प्रथम संकल्प करना चाहिये। व्रत के पहले दिन संकल्प किया जाता है। उसके बाद आप नियमित पूजा और वत करें। सबसे पहले हाथ में जल, अक्षत, पान का पत्ता, सुपारी और कुछ सिक्के लेकर निम्न मंत्र के साथ संकल्प करें:‌ -

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः। श्री मद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्याद्य श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरेऽष्टाविंशतितमे कलियुगे प्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर्गतब्रह्मावर्तैकदेशे पुण्यप्रदेशे बौद्धावतारे वर्तमाने यथानामसंवत्सरे अमुकामने महामांगल्यप्रदे मासानाम्‌ उत्तमे अमुकमासे अमुकपक्षे अमुकतिथौ अमुकवासरान्वितायाम्‌ अमुकनक्षत्रे अमुकराशिस्थिते सूर्ये अमुकामुकराशिस्थितेषु चन्द्रभौमबुधगुरुशुक्रशनिषु सत्सु शुभे योगे शुभकरणे एवं गुणविशेषणविशिष्टायां शुभ पुण्यतिथौ सकलशास्त्र श्रुति स्मृति पुराणोक्त फलप्राप्तिकामः अमुकगोत्रोत्पन्नः अमुक नाम अहं अमुक कार्यसिद्धियार्थ सोलह सोमवार व्रत प्रारम्भ करिष्ये ।

सभी वस्तुएँ श्री शिव भगवान के पास छोड़ दें।
अब दोनों हाथ जोड़कर शिव भगवान का ध्यान करें।

आवाहन:-

• अब हाथ में अक्षत तथा फूल लेकर दोनों हाथ जोड़ लें और भगवान शिव का आवाहन करें ।
ऊँ शिवशंकरमीशानं द्वादशार्द्धं त्रिलोचनम्।
उमासहितं देवं शिवं आवाहयाम्यहम्॥
• हाथ में लिये हुए फूल और अक्षत शिव भगवान को समर्पित करें।
• सबसे पहले भगवान शिव पर जल समर्पित करें।
• जल के बाद सफेद वस्त्र समर्पित करें।
• सफेद चंदन से भगवान को तिलक लगायें एवं तिलक पर अक्षत लगायें।
• सफेद पुष्प, धतुरा, बेल-पत्र, भांग एवं पुष्पमाला अर्पित करें।
• अष्टगंध, धूप अर्पित कर, दीप दिखायें।
• भगवान को भोग के रूप में ऋतु फल या बेल और नैवेद्य अर्पित करें।
इसके बाद सोमवार व्रत कथा को पढ़े अथवा सुने। ध्यान रखें कम-से-कम एक व्यक्ति इस कथा को अवश्य सुने। कथा सुनने वाला भी शुद्ध होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल के पास बैठे। तत्पश्चात शिव जी की आरती करें। उपस्थित जनों को आरती दें और स्वयं भी आरती लें। सोलह सोमवार के दिन भक्तिपूर्वक व्रत करें। आधा सेर गेहूं का आटा को घी में भून कर गुड़ मिला कर अंगा बना लें । इसे तीन भाग में बाँट लें। अब दीप, नैवेद्य, पूंगीफ़ल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, जनेउ का जोड़ा, चंदन, अक्षत, पुष्प, आदि से प्रदोष काल में भगवान शिव का पूजन करें। एक अंगा भगवान शिव को अर्पण करें। दो अंगाओं को प्रसाद स्वरूप बांटें, और स्वयं भी ग्रहण करें। सत्रहवें सोमवार के दिन पाव भर गेहूं के आटे की बाटी बनाकर, घी और गुड़ बनाकर चूरमा बनायें. भोग लगाकर उपस्थित लोगों में प्रसाद बांटें ।

सोलह सोमवार व्रत कथा आरम्भ ॥ पहला अध्याय ॥

mahashivratri vrat katha

16 Monday Fast Starts || FIRST CHAPTER ||

Once upon a time God Shiva and Goddess Parvati came to earth to visit.They reached Amaravati City during their visit . The king of that city was a devotee of God Shiva.
He build a very huge temple of God Shiva and Parvati. God Shiva and Goddess Parvati loved that temple. Once upon a time Goddess Parvati and God Shiva stay at that same temple , and Goddess Parvati insisted God Shiva to play chausar. God Shiva ready to play chauser with Goddess Parvati. Before start to play ,Goddess Parvati asked to Priest of the temple that who will win the game. Priest replied without thought that God Shiva will be the winner.
But Goddess Parvati won the chauser game. That’s why Goddess Parvati became angry on that priest because his word was wrong and she cursed him – “You spoken a lie so you will have to suffer with leprosy ” God Shiva tried to cool down Goddess Parvati but God Shiva could not be able to convinced her.