वैभव लक्ष्मी श्लोक

लक्ष्मी जी की महिमा :
पत्रभ्याग्वादंमन चरण प्रकाश्शालन भोजन !
सत्सेवा पित्रुदेवचन विधिही सत्याम्गावं पालनम !
धान्य नामापि संग्रहो ना कलाहस्चित्ता त्रुऊपा प्रिया !
द्रष्टा प्राह वसामी कामाला तस्मीन ग्रुहे निश्चला !!
अर्थ:
जहां मेहमानों का आव-भगत किया जाता है,
उनको भोजन कराया जाता है , जहां सज्जनों की सेवा की जाती है,
जहाँ निरंतर भाव से भगवान की पूजा और धन्य धार्मिक कार्य किये जाते हैं, जहाँ सत्य का पालन किया जाता है, जहाँ गलत कार्य नहीं होते, जहां गायों की रक्षा की जाती हैं, जहाँ दान देने के लिए धन्य का संग्रह किया जाता है , जहाँ क्लेश नहीं होता, जहाँ पत्नी संतुष्ट और विनम्र है, ऐसे जगह पर मैं सदा निश्छल रहती हूँ। बाकी जगह पर कभी कभार दृष्टि डालती हूँ ।
अंत में ग्यारह बार सच्चे ह्रदय से 'जय माँ लक्ष्मी' बोले ।
फिर माँ का प्रसाद उपस्थित लोगों में बाँट दें।और थोड़ा प्रसाद अपने लिये रखें । अगर आप में शक्ति हो तो सारा दिन उपवास रखें और सिर्फ प्रसाद खा कर शुक्रवार का व्रत करें । न शक्ति हो तो एक बार शाम को प्रसाद ग्रहण करते समय खाना खा लें । अगर थोड़ी शक्ति भी न हो तो दो बार भोजन कर सकते हैं । अगली सुबह स्नान कर माँ वैभव लक्ष्मी का स्तवन करें। सभी वस्तुओं को हटा दें। कटोरी में रखा गहना या रुपया को तिजोरी मे रख दें। कलश का पानी तुलसी क्यारी में डाल दें और चावल पक्षियों को डाल दें । इसी तरह शास्त्रीय विधि अनुसार व्रत करने से उसका फल अवश्य मिलता है ।
उद्यापन विधि आगे...

Vaibhav laxmi slok

Glory Of Laxmi Ji:
Patrabhyaagvaadamman Charan Prakaashshaalan Bhoojan,
Satseevaa Pitrudevachan Vidhahi Satyaamgaavan Paalanam,
Dhaany Naamaapi Sangraho Naa Kalaahaschittaa Truoopaa Priyaa!
Drashtaa Praah Vasaami Kaalaamaa Tasmeen Gruhee Nishchalaa
Meaning: I always reside on those place where guest get welcome, get food,served gentle men,people always involved in god’s worship and other religious work, always follow truthness,never do wrong work,save cows,collect money for charity,never do quarrel. wife get satisfaction and having humble nature.I never saw on rest of the place.
At last, said ‘Jay Maa Laxmi’ eleven times.
Distribut prasad to all present people and keep little for yourself.If you have capacity then only eat prasad during vrat.If you could not keep fast for whole day then take food with prassad.If you are very weak then you can eat food twice in a day.Next day morning, take bath and read Laxmi Stvan.All wosrhip material removed. Take ornaments or coin from bowl and keep it in locker .Pour the kalassh’s water in tulsi’s tree and keep rice for birds.Those people who keep this fast like mentioned ritual process then they wil difinately get result.

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