शनि व्रत उद्यापन विधि
Shani Vrat Udyapan Vidhi in Hindi Page 1/8

तैंतीस शनिवार का व्रत पूरा हो जाने पर चौंतीसवें शनिवार को व्रत का उद्यापन करना चाहिये।। उद्यापन के दिन विधिवत पूजा, हवन करें, ब्राह्मणों को दान दें।

शनि व्रत उद्यापन विधि पूजन सामग्री

शनिदेव की प्रतिमा – लोहे अथवा टीन की चादर से बनी हुई
पान- २
लौंग - १ पैकेट
इलायची- १ पैकेट
गुड़ -२५० ग्राम
वस्त्र(काला अथवा नीला) - २
यज्ञोपवीत- १ जोड़ा
सरसों तेल- १.२५ किलो
कृष्ण चंदन- १ पैकेट
दीप- ३ (२ लोहे (शनिदेव) एवं एक मिट्टी (पीपलके लिये) का)
कृष्ण धूप-१ पैकेट
पुष्पमाला - १
ऋतुफल- १.२५ किलो
नैवेद्य(काले चने से बना हुआ, काला मिष्ठान, तिल मिश्रित मिष्ठान)
जल-पात्र- १
फूल(काकमाची, कागलहर के पुष्प)
चम्मच
कलश
काला तिल – १०० ग्राम
दूर्वा
अक्ष त(काजल से रंगी हुई)- २५० ग्राम
सुपारी- २
रूपये (सिक्के – १रुपये के)

हवन की सामग्री

घी- १.२५ किलो
हवन कुण्ड
शमी का लकड़ी - १.२५ किलो
हवन सामग्री- १ पैकेट

दान के लिये:-

काला वस्त्र- १.२५ मीटर
छाता- १
जूता-१
उड़द- १.२५ किलो
चावल- १.२५ किलो
काला तिल- १.२५ किलो
सरसों का तेल-- १.२५ किलो
लोहे का कोई सामान

शनि व्रत उद्यापन विधि
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पूजनसाधक ब्रह्म मुहुर्त में उठकर अपने नित्य क्रम से निवृत हो स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहन लें। यदि हो सके तो पूजा घर पर करें या किसी शनि मंदिर में जाकर पूजा करें। पूजा की सभी सामग्री पूजा स्थान पर एकत्रित कर लें। साधक पूर्वाभिमुख होकर आसन पर बैठ जाये।
यदि घर पर पूजा करना है तो चौकी पर काला वस्त्र बिछायें । काले चावल से चौबीस दल का कमल बनायें एवं उस पर शनि देव की प्रतिमा स्थापित करें।

पवित्रीकरण

हाथ में जल लेकर मंत्र –उच्चारण के साथ अपने ऊपर जल छिड़कें:-
ॐ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा।
यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः॥
इसके पश्चात् पूजा कि सामग्री और आसन को भी मंत्र उच्चारण के साथ जल छिड़क कर शुद्ध कर लें:-
पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग षिः सुतलं छन्दः
कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥