शनि शांति के उपाय:-

∗ शनिवार को प्रात:काल उठकर नित्य कर्म कर लें। स्नान कर नित्य का पूजा करें। उसके बाद हनुमान जी के मूर्ति के पास बैठकर १०१ बार ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करें । पाठ पूरा हो जाने पर दोनों हाथ जोड़कर हनुमान जी से शनि के बुरे प्रभाव से मुक्ति के लिये प्रार्थना करें। हनुमान जी को शुद्ध देशी घी से बने हुये चूरमे के लड्डू का भोग लगायें। ध्यान रखें कि ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ सुर्योदय के एक घंटे के अंदर होना चाहिये। शनिवार को उपवास रखें। शाम को मीठा भोजन करें।
∗ शनिवार को काली गाय की पूजा करें। उसे रोली लगायें एवं सींगों पर कलावा बांधे। धूप-दीप दिखायें। गाय की परिक्रमा करें; तत्पश्चात बूंदी के चार लड्डू गाय को अपने हाथों से खिलायें। काली गाय की सेवा अर्चना से शनि देव प्रसन्न होते हैं।
∗ शनिवार को उपवास रखें। सुर्यास्त के पश्चात हनुमानजी का पूजन करें। सिंदूर तथा लाल रंग के पुष्प अर्पित करें। तिल के तेल का दीपक जलायें। पांच अथवा सात शनिवार तक यह उपाय करने से शाढ़े साती का प्रभाव कम हो जाता है।
∗ प्रत्येक शनिवार को वट एवं पीपल के वृक्ष की जड़ में सुर्योदय से पूर्व सरसों तेल का दीपक जलाकर, दूध अर्पित करें एवं धूप दिखायें।


∗ शनिवार को काले कुत्ते एवं बंदरों को लड्डू खिलाने से भी शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
∗ काले घोड़े की नाल का अंगूठी बनवाकर पहनें।
∗ प्रत्येक शनिवार को बंदरों को केला, खील, गुड़ एवं काले चने खिलाने से शनि ग्रह की शांति होती है।