रविवार व्रत उद्यापन विधि
Ravivar Vrat Udyapan Vidhi in Hindi Page 1/7

पूरे पाँच वर्ष या एक वर्ष तक रविवार का व्रत करने के बाद अथवा बारह रविवार व्रत करने के बाद व्रत का उद्यापन करना चाहिये।

रविवार व्रत उद्यापन विधि पूजन सामग्री

सुर्य भगवान की मूर्ति (स्वर्ण या कांस्य की एक माश की/सामर्थ्यानुसार) – १
चांदी का रथ-१ (सामर्थ्यानुसार)
द्वादश दल का कमल का फूल (कांस्य का सामर्थ्यानुसार)) -१
पात्र ( ताम्बेका सामर्थ्यानुसार)) -१
कलश ( ताम्बेका सामर्थ्यानुसार)) -१
चावल/अक्षत ( लाल रंग से रंगे हुए) – २५० ग्राम जल
धूप – १ पैकेट
दीप - २
गंगाजल
पूजन में कनेर (कनइल) का फूल
लाल चंदन- – १ पैकेट
गुड़
लाल वस्त्र -१.२५ मीटर (२)
यज्ञोपवीत- १ जोड़ा
रोली
गुलाल
नैवेद्य
जल पात्र
पंचामृत( कच्चा दूध,दही, घी,मधु तथा शक्कर मिलाकर बनायें)
पान -२
सुपारी- २
लौंग– १ पैकेट
इलायची- – १ पैकेट
नैवेद्य
नारियल
ऋतुफल
कपूर
आरती के लिये पात्र

हवन की सामग्री

घी- १.२५ किलो
हवन कुण्ड
आम की लकड़ी-१.२५ किलो
गाय के दूध से बनी खीर- १.२५ किलो

रविवार व्रत उद्यापन विधि
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रविवार के दिन प्रात:काल उठकर नित्य-क्रम कर स्नान कर लें। लाल वस्त्र धारण करें। पूजा गृह को स्वच्छ कर शुद्ध कर लें। सभी सामग्री एकत्रित कर लें। लकड़ी के चौकी पर लाल वस्त्र बिछायें । कमल के फूल को स्थापित करें। कमल के मध्य में जल से भरा कलश स्थापित करें । कलश के ऊपर पूर्ण पात्र रखें। पूर्णापात्र के ऊपर सुर्य भगवान की प्रतिमा को चांदी के रथ के साथ स्थापित करें । सामने आसन पर बैठ जायें। सभी पूजन सामग्री एकत्रित कर बैठ जायें।

पवित्रीकरण

सर्वप्रथम हाथ में जल लेकर मंत्र के द्वारा अपने ऊपर जल छिड़कें:-
ॐ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा।
यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः॥
इसके पश्चात् पूजा कि सामग्री और आसन को भी मंत्र उच्चारण के साथ जल छिड़क कर शुद्ध कर लें:-
पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग षिः सुतलं छन्दः
कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥