रथ सप्तमी व्रत विधि

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सात्विक भोजन करें। षष्ठी को उपवास करें और सप्तमी को पारण करने का विधान है। वस्तुत: षष्ठी को उपवास करके पंचोपचार विधि से सुर्यनारायण की पूजा करें। सप्तमी को सुर्योदय से पूर्व उठकर किसी नदी अथवा जलाशय में जाकर स्नान करें। स्नान के बाद सुवर्ण, चाँदी अथवा ताम्र (यथाशक्ति अनुसार) के पात्र में लाल रंग की रंगी हुई बत्ती और तिल का तेल डालकर दीपक प्रजवलित करे। उस दीपक को सिर पर रखकर भगवान सुर्य का ध्यान करे और निम्न मंत्र का उच्चारण करें

उसके बाद दीपक को जल में प्रवाहित कर दें। फिर स्नान कर देवता और पितरों का तर्पण करे। चौकी अथवा लकड़ी के पटरे पर बाद लाल चंदन से कर्णिका सहित अष्टदल कमल बनाये। उस कमल के बीच में शिव-पार्वती की स्थापना करें। अब सबसे पहले धूप, दीप, अक्षत,चंदन, पुष्प,वस्त्र तथा नैवेद्य से शिव-पार्वती की पूजा करें। साथ मे “ ऊँ” मंत्र का जाप करें।
इसके बाद आठ कमल दल में अलग-अलग आठ नामों से धूप, दीप, अक्षत,चंदन, पुष्प, वस्त्र तथा नैवेद्य से सुर्य की पूजा करें और मंत्र का उच्चारण करें:‌-
ऊँ भानवे नम:
ऊँ रवये नम:
ऊँ विवस्वाने नम:
ऊँ भास्काराय नम:
ऊँ सविताय नम:
ऊँ अर्क नम:
ऊँ सहस्त्रकिरणे नम:
ऊँ सर्वात्माका नम:
इसके बाद व्रत कथा को सुने अथवा सुनायें।