Baba Neem Karoli Maharaj ji - बाबा नीम करोली महाराज जी

nidhivan vrindavan

1. नीम करोली बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गाँव में हुआ था। वे ब्राह्मण थे।
Neem Karoli Baba was born to a Brahmin family in Akbarpur village of Firozabad district in Uttar Pradesh.
2. 11 वर्ष की आयु में उनकी शादी हो गई थी। शादी के कुछ समय बाद हीं उन्होंने अपना घर छोड़ कर दिया था। उसके बाद वे भारत के कई स्थानों में साधु के रूप में रहें। उन जगहों पर वे अनेकों नाम से जाने जाते थे।
When he was 11, Neem Karoli Baba was married to a Brahmin girl. Soon after his marriage, he left his home and wandered throughout the India as a sadhu and was known by many names.
3. ऐसा माना जाता है कि 17 वर्ष की आयु में उन्हें ज्ञान प्राप्त हो गया था।
It is believed that by the time Neem Karoli Baba was 17 years old, he knew everything.
4. घर से जाने के 10-15 वर्ष बाद उनके पिता जी को किसी के द्वारा यह सूचना मिली कि वे(नीम करोली बाबा) फरुक्काबाद , उत्तर प्रदेश में किसी स्थान पर दिखे हैं। उनके पिता को जैसे हीं यह सूचना मिली, वे तुरंत उस स्थान पर गये और उन्होंने अपने पुत्र को कहा कि घर लौट चले एवं अपनी गृहस्थी सम्भालें। उसी दौरान नीम करोली बाबा के दो पुत्र और एक पुत्री का जन्म हुआ। वे जब तक अपने घर पर रहे, तब तक सामाजिक कार्यों में लगे रहते थे।.
After 10-15 years, his father was informed that his son was spotted somewhere in Uttar Pradesh's Farrukhabad. His father immediately rushed to the district and ordered him to return to home and stay with the family. Baba has two sons and a daughter. During his stay at home, Neem Karoli Baba kept himself engaged in social works.

5. कुछ वर्षों बाद वे फिर अपन तप की ओर चल पड़े । 1962 ई. मे उन्होंने कैंची गाँव में एक चबूतरा बनवाया था जहाँ पर उनके दो अध्यात्मिक गुरु साधु प्रेमी बाबा और सोमबरी महाराज यज्ञ किया करते थे।
In 1962, Baba Neem Karoli built a chabootara around a place where two spiritual gurus Sadhu Premi Baba and Sombari Maharaj had performed Yagyas in Kainchi village.
6. उन्होंने कई स्थानों पर हनुमान जी का मंदिर बनवाया। उन्होंने पहला हनुमान मंदिर का उद्घाटन 15 जून, 1964 को किया था। उसके बाद दूसरा हनुमान मंदिर वृन्दावन में बनवाया।
He also built Lord Hanuman's temple at many places. The first temple of Lord Hanuman was inaugurated in June 15, 1964. The second temple was built in Vrindavan.
7. नीम करोली बाबा का मंदिर कई स्थानों पर है, जिसमें कैंची, वृन्दावन, लखनउ, टेक्सास, युनाइटेड स्टेट शामिल है।
Baba Karoli has temples in several places including Lucknow and an Ashram in Texas, US. According to his website, Maharajji established at least 108 temples.
8. सन् 1960 के समय के अमेरिकन लेखक बाबा राम दास ने नीम करोली बाबा पर किताब लिखा, उसके बाद सैंकड़ों विदेशी उनके दर्शन के लिये भारत आये।
In the late 60's an American known as Baba Ram Dass authored books telling of Neem Karoli Baba and hundreds of westerners went for his darshan.
9. नीम करोली बाबा ने अपने समाधि के लिये वृन्दावन को चुना। उन्होंने इस नश्वर संसार को अनंत चतुर्दशी के दिन 10 सितम्बर, 1973 को छोड़ दिया। वृन्दावन के नीम करोली आश्रम में उनके समाधि स्थल पर 15 जुन, 1976 को उनकी प्रतिमा सथापित की गई।
Neem Karoli Baba opted Vrindavan's land for his Samadhi. He died on September 10, 1973. A temple for him was subsequently built at the Ashram. His statue was consecrated on June 15, 1976.