मंगला गौरी उद्यापन पूजा विधि| Mangala Gauri Vrat Udyapan Vidhi
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प्रातःकाल उठकर नित्यकर्म से निवृत हो स्नान करें। स्वच्छ नवीन वस्त्र धारण करें। पूजा गृह को साफ तथा शुद्ध कर लें । केले के चार पत्ते या चार तने से मण्डप बनायें। उसे विभिन्न प्रकार के पुष्प तथा रेशमी वस्त्रों से सजायें। सभी पूजन सामग्री एकत्रित कर पूर्व की ओर मुख करके आसन पर बैठ जायें। पात्र को चावल से भरकर मण्डप के मध्य में रखें। उस पर लाल रेशमी वस्त्र बिछायें। पात्र पर गौरी माँ की मूर्ति स्थापित करें ।
सबसे पहले हाथ में जल लेकर निम्न मंत्र उच्चारण के द्वारा स्वयं पर जल छिड़ककर अपने आप को शुद्ध कर लें”-
ॐ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा।
यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः॥

उसके बाद हाथ में जल लेकर निम्न मंत्र उच्चारण के द्वारा सभी पूजन सामग्री पर जल छिड़ककर पूजन सामग्री को शुद्ध कर लें”-
पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग षिः सुतलं छन्दः
कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

तत्पश्चात् अपने आत्मा की शुद्धि के लिये पुष्प अथवा चम्मच से मुख में एक-एक बूंद जल डलकर निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करें:-
ॐ केशवाय नमः
ॐ नारायणाय नमः
ॐ वासुदेवाय नमः

इसके बाद “ॐ हृषिकेशाय नमः” कहते हुये अंगूठे से होंठ को पोछ ले।

गणेश पूजन:-

किसी पात्र या कटोरी में गणेश जी की मूर्ति रखकर चौकी पर रखें। धूप दीप, अक्षत, चंदन, पुश्प और नैवेद्य अर्पित कर गणेश जी का पूजन करें।