गाज माता का व्रत | Gaqaj Mata Vrat

अधिक(लौंद) /मल मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पद्मिनी एकादशी कहलाती हैं। यह व्रत इस वर्ष, २०१८ में २५ मई (शुक्रवार) को है। इस व्रत को करने से सभी पापों का नाश होता है और मुक्ति की प्राप्ति होती है। पद्मिनी एकादशी का व्रत करने वाले मनुष्य को समस्त तीर्थ और यज्ञों का फल मिल जाता है। जो मनुष्य विधि पूर्वक भगवान की पूजा तथा व्रत करते हैं, उनका जन्म सफल होता है और इस लोक में अनेक सुखों को भोगकर अन्त में परमधाम को जाते हैं ।
गाज माता का व्रत तथा पूजन भाद्र मास के किसी भी शुभ तिथि को कर सकते हैं। यदि किसी क घर में पुत्र-जन्म या पुत्र का विवाह होता है तो उस वर्ष भाद्र मास में इस व्रत का उजमन भी किया जाता है। यह व्रत स्त्रियाँ अपने संतान की लम्बी आयु तथा सुख के लिये करती हैं।
पूजन सामग्री:-
एक लोटा,
गेहूँ के दाने,
पूड़ी,
हलवा