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धूपं- धूप जला कर धूप तैयार करें ।
ॐ वनस्पति रस:उत्पन्नो गंधाढ्य: सुमनोहर:।
आघ्रेय: सर्व देवानां धूप: अयं प्रतिगृहृताम् ॥
ॐ महालक्ष्म्यै नम: धूपं आघ्रापयामि।
महालक्ष्मी को धूप समर्पित करें ।

दीपं--देशी घी तथा रूई की बत्ती से दीपक प्रज्वलित करें।
ॐ कार्पासवर्त्ति संयुक्तं घृतयुक्तं मनोहरम्।
तमोनाशकरं दीपं गृहाण परमेश्वरि॥
ॐ महालक्ष्म्यै नम: दीपं दर्शयामि।
महालक्ष्मी को दीपक मंगल कामना के साथ समर्पित करें ।
अब आप शुद्ध जल से हाथ धो लें ।

नैवैद्यम्- देवी की संतृप्ति के लिये मिठाई,गुड़,साबुत धनिया,एवं भोग एक पात्र में लें। गणेश जी के भोग के लिये लड्डु रखें ।
मंत्र उच्चारण के साथ गणेश जी को लड्डु समर्पित करें।उसके बाद हाथ और मुख धोने के लिये जल समर्पित करें ।
ॐ श्री गणेशाय नम: नैवेद्यम् समर्पयामि।
मध्ये पानीयम् उत्तरपोशनार्थ,हस्तप्रक्षालनार्थं
मुख प्रक्षालनार्थं च जलं समर्पयामि।

मंत्र उच्चारण के साथ लक्ष्मी जी को भोग समर्पित करें।उसके बाद हाथ और मुख धोने के लिये जल समर्पित करें ।
नैवेद्यं गृहृताम् देवि भक्ष्यभोज्य समन्वितम्।।
षडरसै: अन्वितम् दिव्यं लक्ष्मि देवि नम: स्तुते ॥
ॐ महालक्ष्म्यै नम: नैवेद्यम् समर्पयामि।
मध्ये पानीयम् उत्तरपोशनार्थ,हस्तप्रक्षालनार्थं
मुख प्रक्षालनार्थं च जलं समर्पयामि।
भोग अर्पित करने के बाद एक-एक चम्मच जल पाँच बार अलग-अलग श्री गणेश और लक्ष्मी जी को समर्पित करते हुए मंत्र बोलें
1. ॐ प्राणाय स्वाहा
2. ॐ अपानाय स्वाहा
3. ॐ व्यानाय स्वाहा
4. ॐ उदानाय स्वाहा
5. ॐ समानाय स्वाहा

करोद्धर्तनं- केशर युक्त चंदन एक पात्र में लें ।
“ॐ महालक्ष्म्यै नम:” यह कह कर करोद्धर्तन के लिये श्री महालक्ष्मी के दोनों हाथों में चंदन उपलेपित करें (लगाएँ)।
अब भगवती को आचमन करायें ।
आचमनं- चम्मच में जल लें ।
ॐ शीतलं निर्मलं तोयं कर्पूरेण सुवासितम्।
आचम्यतां इदं देवि । प्रसीद त्वं परमेश्वरी ।
ॐ महालक्ष्म्यै नम: । आचमनीयम् जलं समर्पयामि।
मुख शुद्धि के लिये जल समर्पित करें ।

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