बुधगुरु व्रत | Budh Guru Vrat

श्रावण-मास के प्रत्येक बुध तथा गुरुवार को बुध-गुरु का व्रत करना चाहिये। इस व्रत के करने से मनुष्य के सभी मनोरथों की पूर्ति होती है। इस व्रत में बुध तथा गुरुवार को बुध-गुरु की मूर्ति की पूजा करनी चाहिये। दही तथा भात का नैवेद्य अर्पित करें एवं दोनों दिन दही तथा भात का नैवेद्य स्वयं भी ग्रहण करें। इस व्रत के करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। इस व्रत में मामा तथा भानजे को भोजन कराने के पश्चात ही अपना व्रत तोड़े। इस व्रत के प्रभाव से सभी कामनाओं की परम सिद्धि हो जाती है और अंत में चंद्रसुर्य पर्यन्त उसका शिव लोक में वास होता है।

बुध-गुरु व्रत कथा, विधि तथा महात्म्य