भाई दूज (Bhai Dooj)

हिन्दू पंचांग के अनुसार भाई दूज (Bhai Dooj) का त्यौहार, साल 2016 में 01 नवम्बर दिन शुक्रवार ( कार्तिक शुक्ल पक्ष के द्वितीय तिथि )को मनाया जाएगा।
भाई दूज का त्योहार भाई बहन के स्नेह को सुदृढ़ करता है। यह त्योहार दीवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है।
इसमें बहनें भाई की लम्बी आयु की प्रार्थना करती हैं। भाई दूज का त्योहार कार्तिक मास की द्वितीया को मनाया जाता है।
भैया दूज को भ्रातृ द्वितीया भी कहते हैं। इस दिन बहनें भाइयों के स्वस्थ तथा दीर्घायु होने की मंगल कामना करके तिलक लगाती हैं।
यदि बहन अपने हाथ से भाई को खाना खिलाये तो भाई की उम्र बढ़ती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इस दिन बहन के घर भोजन करने का विशेष महत्व है। यदि कोई बहन न हो तो गाय, नदी आदि स्त्रीत्व पदार्थ का ध्यान करके अथवा उसके समीप बैठ कर भोजन कर लेना भी शुभ माना जाता है।

भाई दूज मुहूर्त (Bhai Dooj Muhurat)

इस साल भाई दूज के दिन तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त दिन में 01 बजकर 09 मिनट से लेकर 03 बजकर 20 मिनट तक का है।

भाई दूज पूजा विधि (Bhai Dooj Puja Vidhi)

इस दिन सुबह पहले स्नान करके गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। बहनें अपने भाई को उनके पूरे परिवार के साथ अपने घर पर भोजन के लिए आमंत्रित करती हैं .
पूजा की तैयारी :- आरती की थाली जिसमे रोली, चावल, नारियल, मिठाई और दीया ।
सबसे पहले भाई को तिलक लगा कर , उनकी आरती की जाती है तथा मिठाई खिलाई जाती है। उसके बाद भाई अपने इक्षानुसार कुछ उपहार अपनी बहन को देते है फिर पूरा परिवार मिलकर विशेष प्रकार का भोजन (चावल के आटे से बना हुआ) ग्रहण करते हैं
तिलक लगाते समय भाई और बहन पूर्व तथा पश्चिम दिशा में हीं बैठे।

भैया दूज की कथा

भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह के प्रतीक का पर्व भाई दूज की कथा इस प्रकार से है: - भगवान सूर्य नारायण.....Read More

भगवान कृष्णा और सुभद्रा की कथा :-

भगवान कृष्णा जब राक्षस नरकासुर का.................Read More

भैया दूज की कहानी ( Bhai Duj ki Kahani )

एक बुढ़िया थी। उसके सात बेटे और एक बेटी थी। बेटी की शादी हो चुकी थी। जब भी उसके बेटे की शादी होती.......... Read More

 

Meet

...

 

 

...

 

 

...

 

 

...

 

 

© 2016 Ganeshlaxhmi.in. All rights reserved |