Angarki Chaturthi Pujan Vidhi, Vrat Vidhi and Katha - अंगारकी चतुर्थी व्रत विधि एवं कथा

प्रत्येक मास के दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि को गणेश जी का पूजन किया जाता है। शुक्ल-पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहलाती है। फाल्गुन मास की संकष्टी चतुर्थी १४ फरवरी,२०१७ को है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से सभी विघ्न बाधायें दूर होती है। यदि संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़े तो यह अति शुभकारक मानी गयी है। मंगलवार के दिन पड़ने वाली चतुर्थी को “अंगारकी चतुर्थी” कहते हैं। गणेश अंगारकी चतुर्थी का व्रत करने से पूरे साल भर के चतुर्थी व्रत के करने का फल प्राप्त होता है।
अंगारक (मंगल देव) के कठिन तप से प्रसन्न होकर गणेश जी ने वरदान दिया और कहा कि चतुर्थी तिथि यदि मंगलवार को होगी तो उसे अंगारकी चतुर्थी के नाम से जाना जायेगा। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के सभी काम बिना किसे विघ्न के सम्पूर्ण हो जाते हैं। भक्तों को गणेश जी की कृपा से सारे सुख प्राप्त होते हैं ।

Angarki Chaturthi Worship Material - अंगारकी चतुर्थी पुजन सामग्री

1. गणेश जी की प्रतिमा
2. धूप
3. दीप
4. नैवेद्य(लड्डु तथा अन्य ऋतुफल)
5. अक्षत
6. फूल
7. कलश
8. चंदन केसरिया
9. रोली
10. कपूर
11. दुर्वा
11. पंचमेवा
12. गंगाजल
13. वस्त्र (2 – एक कलश के लिये- एक गणेश जी के लिये)
14. अक्षत
15. घी
16. पान
17. सुपारी
18. लौंग
19. इलायची
20. गुड़
21. पंचामृत (कच्चा दूध, दही,शहद, शर्करा, घी)

Angarki Chaturthi Hawan Material - अंगारकी चतुर्थी हवन के लिये

1. खीर
2. कनेर के फूल
3. गुलबांस की लकड़ी

Angarki Chaturthi worship Method - अंगारकी चतुर्थी पूजन विधि:-

प्रात: काल उठकर नित्य कर्म से निवृत हो, शुद्ध हो कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। श्री गणेश जी का पूजन पंचोपचार (धूप, दीप, नैवेद्य, अक्षत, फूल) विधि से करें।

Puja method for Angarki Chaturthi