अनंत चतुर्दशी व्रत - Anant Chaturthi 2017

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान श्री हरि की पूजा की जाती है। यह व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। इस व्रत में सूत या रेशम के धागे को लाल कुमकुम से रंग, उसमें चौदह गांठे (14 गांठे भगवान श्री हरि के द्वारा 14 लोकों की प्रतीक मानी गई है) लगाकर राखी की तरह का अनंत बनाया जाता है। इस अनंत रूपी धागे को पूजा में भगवान पर चढ़ा कर व्रती अपने बाजु में बाँधते हैं। पुरुष दाएं तथा स्त्रियां बाएं हाथ में अनंत बाँधती है। यह अनंत हम पर आने वाले सब संकटों से रक्षा करता है। यह अनंत धागा भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला तथा अनंत फल देता है। यह व्रत धन पुत्रादि की कामना से किया जाता है। इस दिन नये धागे के अनंत को धारण कर पुराने धागे के अनंत का विसर्जन किया जाता है ।

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अनंत चतुर्दशी तिथि २०१७ - Anant Chaturdashi 2017 date

अनंत चतुर्दशी व्रत वर्ष २०१७ में ५ सितम्बर (मंगलवार) (5th September 2017) को है।
अनंत चतुर्दशी पूजा मुहुर्त:
Delhi- Anant Chaturdashi Puja Muhurat = 06:04 AM to 12:41 PM
Duration = 6 Hours 36 Mins
Mumbai- Anant Chaturdashi Puja Muhurat = 06:27 AM to 12:41PM
Duration = 6 Hours 13 Mins
Kolkatta: Anant Chaturdashi Puja Muhurat = 05:23 AM to 12:41PM
Duration = 7 Hours 17 Mins
Chennai: Anant Chaturdashi Puja Muhurat = 06:01AM to 12:41PM
Duration = 6 Hours 39 Mins

अनंत चतुर्दशी व्रत पूजन सामग्री (Anant Chaturdashi Vrat Worship Materials)

• शेषनाग पर लेटे हुए श्री हरि की मूर्ति अथवा तस्वीर
• आसन (कम्बल)
• धूप - एक पैकेट
• पुष्पों की माला – चार
• फल – सामर्थ्यानुसार
• पुष्प (14 प्रकार के)
• अंग वस्त्र –एक
• नैवैद्य(मालपुआ )
• मिष्ठा्न - सामर्थ्यानुसार
• अनंत सूत्र (14 गाँठों वाले ) – नये
• अनंत सूत्र (14 गाँठों वाले ) – पुराने
• यज्ञोपवीत (जनेऊ) – एक जोड़ा
• वस्त्र
• पत्ते – 14 प्रकार के वृक्षों का
• कलश (मिट्टी का)- एक
• कलश पात्र (मिट्टी का)- एक
• दूर्बा
• चावल – 250 ग्राम
• कपूर- एक पैकेट
• तुलसी दल
• पान- पाँच
• सुपारी- पाँच
• लौंग – एक पैकेट
• इलायची - एक पैकेट
• पंचामृत (दूध,दही,घी,शहद,शक्कर)

अनंत चतुर्दशी व्रत पूजन विधि प्रारम्भ - (Anant Chaturdashi Vrat Worship Method) Page 1/5

पुराणों मे इस व्रत को करने का विधान नदी या सरोवर पर उत्तम माना गया है। परंतु आज के आधुनिक युग में यह सम्भव नहीं है। अत: घर में ही पूजा स्थान पर शुद्धिकरण करके अनंत भगवान की पूजा करें तथा कथा सुने। साधक प्रात: काल स्नानादि कर नित्यकर्मों से निवृत हो जायें। सभी सामग्री को एकत्रित कर लें तथा पूजा स्थान को पवित्र कर लें। पत्नी सहित आसन पर बैठ जायें।

पवित्रीकरण
अब दाहिने हाथ में जल लेकर निम्न पवित्रीकरण मंत्र का उच्चारण करें और सभी सामग्री , उपस्थित जन- समूह पर उस जल का छिंटा दें कर सभी को पवित्र कर लें ।
पवित्रीकरण मंत्र –
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्व अवस्थांगत: अपिवा।
यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्य अभ्यन्तर: शुचिः॥
आचमन
दाएँ हाथ में जल लें निम्न आचमन मंत्र के द्वारा तीन बार आचमन करें
“ॐ केशवाय नमः” मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पी लें।
“ॐ नारायणाय नमः” मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पी लें।
“ॐ वासुदेवाय नमः” मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पी लें।
तत्पश्चात“ॐ हृषिकेशाय नमः” कहते हुए दाएँ हाथ के अंगूठे के मूल से होंठों को दो बार पोंछकर हाथों को धो लें।

पवित्री धारण
तत्पश्चात् निम्न मंत्र के द्वारा कुश निर्मित पवित्री धारण करे -
पवित्रे स्थो वैष्णव्यौ सवितुर्वः प्रसव उत्पुनाम्यच्छिद्रेण पवित्रेण सूर्यस्य रश्मिभिः ।
तस्य ते पवित्रपते पवित्रपूतस्य यत्कामः पुने तच्छकेयम् ।
स्वस्तिवाचन –
हाथ में अक्षत तथा पुष्प लें और निम्न मंत्रों को बोलते हुए थोड़ा –थोड़ा पुष्प भूमि पर छोड़ते जायें ।
ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नम : । ॐ केशवाय नम : । ॐ नारायणणाय नम : । ॐ माधवाय नम : । ॐ गोविंदाय नम : । ॐ विष्णवे नम : । ॐ मधुसूदनाय नम : । ॐ त्रिविक्रमाय नम : । ॐ वामनाय नम : । ॐ श्रीराधाय नम : । ॐ ह्रषीकेशाय नम : । ॐ पद्मनाभाय नम : । ॐ दामोदराय नम : । ॐ संकर्षणाय नम : । ॐ वासुदेवाय नम : । ॐ प्रद्युम्नाय नम : । ॐ अनिरुद्धाय नम : । ॐ पुरुषोत्तमाय नम : । ॐ अधोक्षजाय नम : । ॐ नरसिंहाय नम : । ॐ अच्युताय नम : । ॐ जनार्दनाय नम : । ॐ उपेंद्राय नम : । ॐ हरये नम : । ॐ श्रीकृष्णाय नम : । ॐ श्रीलक्ष्मीनारायणाभ्यां नम : । ॐ उमामहेश्वराभ्यां नम : । शचीपुरन्दराभ्यां नम : । मातृपितृभ्यां नम : । इष्टदेवताभ्यो नम : । ग्रामदेवताभ्यो नम : । स्थानदेवताभ्यो नम : । वास्तुदेवताभ्यो नम : । सर्वेभ्यो देवेभ्यो नम : । सर्वेभ्यो ब्राह्मणेभ्यो नम : ।
संकल्प : -
हाथ मे अक्ष्त ,पान का पत्ता ,सुपारी तथा सामर्थ्यानुसार सिक्के लेकर संकल्प मंत्र उच्चारित करते हुए संकल्प करें –
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु: श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्यॐ विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य श्रीब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्द्धे विष्नुपदे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे, अष्टाविंशतितमे युगे कलियुगे, कलिप्रथमचरणे भूर्लोके जम्बुद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्तैकदेशे अमुकक्षेत्रे (अपने नगर तथा क्षेत्र का नाम लें) बौद्धावतारे अमुकनाम संवत्सरे श्रीसुर्ये अमुकयाने अमुक ऋतो ( ऋतु का नाम लें ) महामंगल्यप्रदे मासानां मासोत्तमे भाद्र मासे शुक्ल पक्षे चतुर्दशी तिथौ अमुक वासरे ( वार का नाम लें ) अमुक नक्षत्रे ( नक्षत्र का नाम लें ) अमुक योगे अमुक-करणे अमुकराशिस्थिते चंद्रे ( जिस राशि में चंद्रमा स्थित हो,उसका नाम लें ) अमुकराशिस्थिते श्रीसुर्ये (जिस राशि में सुर्य स्थित हो,उसका नाम लें ) देवगुरौ शेषेषु ग्रहेषु यथायथा- राशिस्थान-स्थितेषु सत्सु एवं ग्रह-गुणग़ण-विशेषण- विशिष्टायां शुभपुण्यतिथौ अमुक गोत्र (अपने गोत्र का नाम लें ) अमुकनाम ( अपना नाम ले ) ऽहं मम सकुटुम्बस्य क्षेमैश्वर्यायुरारोग्यचतुर्विधपुरुषार्थसिद्ध्यर्थं मया आचरितं वा आचार्यमाणस्य व्रतस्य सम्पूर्णफलावाप्त्यर्थं श्रीमदनन्तपूजनमहंकरिष्ये। श्रीमदनन्तव्रतांगत्वेन गणेशपूजनं ,यमुनापूजनादिकं च करिष्ये।