अधिक मास की संकष्टी चतुर्थी - Adhik Maas Sankashti Chaturthi

अधिक मास की संकष्टी चतुर्थी ०२ जून, २०१८ (शनिवार) को है।

अधिक मास की संकष्टी चतुर्थी पुजन सामग्री

1. गणेश जी की प्रतिमा
2. धूप
3. दीप
4. नैवेद्य(लड्डु- घी तथा शक्कर मिश्रित 15 लड्डूतथा अन्य ऋतुफल)
5. अक्षत
6. लाल कनेर के फूल
7. कलश
8. चंदन लाल
9. रोली
10. कपूर
11. दुर्वा
12. गंगाजल
13. वस्त्र (2 – एक कलश के लिये- एक गणेश जी के लिये)
14. अक्षत
15. घी
16. पान
17. सुपारी
18. लौंग
19. इलायची
20. गुड़
21. पंचामृत (कच्चा दूध, दही,शहद, शर्करा, घी)
22. चौकी या लकड़ी का पटरा

अधिक मास की संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि - विधि विधान से

ध्यानं

दोनो हाथ जोड़कर हाथ में पुष्प लेकर गणेश जी का ध्यान करें :-
वक्रतुण्ड महाकाय सुर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।
उपर लिखे हुए मंत्र का उच्चारण करें और पुष्प श्री गणेश जी के चरणों में छोड़ दें ।

आवाहनं:-

हाथ में चावल लेकर दिये गये मंत्र को पढ़ते हुए श्री ग़णेश जी के चरणों मे चावल छोड़ दें
ऊँ गं गणपतये नमः आवाहयामि स्थापयामि ।

आसनं:-

दाएँ हाथ मे पुष्प लें और दिये गये मंत्र का उच्चारण करते हुए
ॐ शम्बराय नमः आसनम् समर्पयामि ।
पुष्प गणेश जी पर छोड़ दें ।

पाद्यं:-

पंचपात्र में से एक चम्मच जल लेकर मंत्र का उच्चारण करें –
ॐ लम्बकर्णाय नम: पाद्योर्पाद्यम समर्पयामि।
और यह जल मूर्ति के आगे या गणेश जी को समर्पित करें ।

अर्घ्यं-

एक अर्घा में गंध, अक्षत, पुष्प लेकर दिये हुए मंत्र को बोलते हुए –
ॐ प्रमोदाय नम: अर्घ्यम समर्पयामि ।
अर्घ्य गणेश जी को समर्पित करें

आचमनं-

चम्मच में थोड़ा जल लेकर दिये हुए मंत्र को बोलते हुए –
ॐ विश्वप्रियाय नम: आचमनीयम् जलम् समर्पयामि ।
यह जल श्री गणेश जी के चरणों मे छोड़ दें ।

स्नानं-

श्री गणेश जी के मूर्ति को को गंगाजल से स्नान करवाएं। एक पात्र में जल लेकर दिये हुए मंत्र को बोलते हुए –
ऊँ ब्रह्मचारिणे नम: स्नानार्थे जलम् समर्पयामि ।
स्नान के लिये श्री गणेश जी को जल समर्पित करें। फिर आचमन के लिये पुन: जल समर्पित करें ।

पंचामृत स्नानं-

एक पात्र में दूध, दही, घी, शहद, शर्करा (शक्कर) मिलाकर पंचामृत बनायें। अब इस पंचामृत को चम्मच में लेकर श्री गणेश जी को स्नान करायें और साथ मे मंत्र का उच्चारण करें ।
ॐ ईशानपुत्राय नमः स्नानार्थे पंचामृतम् समर्पयामि ।

शुद्धोदक-स्नान –

अब शुद्ध जल लेकर दिये हुए मंत्र को बोलते हुए -
ॐ शम्भवे नमः शुद्धोदक स्नानार्थे जलम् समर्पयामि ।
शुद्ध जल से स्नान करायें।

वस्त्रं-

वस्त्र (वस्त्र ना हो तो मौली तोड़कर) हाथ में ले तथा मंत्र पढ़ते हुए –
ऊँ गणेश्वराय नम: वस्त्रम् समर्पयामि । आचमनीयम् जलम् समर्पयामि ।
वस्त्र समर्पित करें । आचमन के लिये जल समर्पित करें ।

उपवस्त्रं-

मौली तोड़कर हाथ में ले तथा मंत्र बोलते हुए श्री गणेश जी को उपवस्त्र समर्पित करें ।
ॐ लम्बकर्णाय नमः उपवस्त्रम् समर्पयामि । आचमनीयम् जलम् समर्पयामि ।
आचमन के लिये जल समर्पित करें

यज्ञोपवीतं

यज्ञोपवीत हाथ में ले तथा मंत्र बोलते हुए श्री गणेश जी को समर्पित करें ।
ॐ महाबलाय नमः यज्ञोपवीतम् समर्पयामि । आचमनीयम् जलम् समर्पयामि ।
आचमन के लिये जल समर्पित करें

गंधं-

एक पात्र में चंदन लें । अनामिका अंगुली (दाएं हाथ की छोटी अंगुली के साथ वाली अंगुली) से चंदन श्री गणेश जी को अर्पित करें ।
ऊँ पुष्टिदाय नम: गंधम् समर्पयामि ।

सिंदूरं-

हाथ मे सिंदूर की डिब्बी लें ।
ॐ गणाधिपाय नमः कुंकुमम् समर्पयामि ।
श्री गणेश जी को सिंदूर समर्पित करें ।

अक्षतं-

हाथ में साबुत चावल और थोड़ा चंदन लेकर मिलाएं।
ॐ गणक्रीडाय नमः अक्षतान् समर्पयामि ।
श्री गणेश जी को अक्षत समर्पित करें ।

पुष्पं-

पुष्प हाथ में लें । मंत्र का उच्चारण करें -
ऊँ विनायकाय नम: पुष्पम् समर्पयामि ।
पुष्प खड़े होकर समर्पित करना चाहिये ।

पुष्पमाला –

दोनों हाथों में पुष्पमाला लें । मंत्र का उच्चारण करें -
ॐ एकदंष्ट्राय नमः पुष्पमाला समर्पयामि ।
पुष्पमाला श्री गणेश जी को समर्पित करें ।

दूर्वादलं (दूब की गुच्छी)-

हाथ में दुर्वा लें । मंत्र का उच्चारण करते हुए श्री गणेश जी को दुर्वा समर्पित करें ।
ॐ मदोदराय नमः दुर्वाङ्कुरान् समर्पयामि ।

धूपं-

धूप जला कर धूप तैयार करें ।
ॐ उमासुताय नम: धूपम् समर्पयामि ।
श्री गणेश जी को धूप समर्पित करें ।

दीपं—

श्री गणेश जी को दीपक मंगल कामना के साथ समर्पित करें ।
ऊँ रुद्रप्रियाय नम: दीपम् दर्शयामि ।
अब आप शुद्ध जल से हाथ धो लें ।

नैवैद्यम्-

पाँच लड्डु एक पात्र में रखें ।हाथ में लड्डु का पात्र लें तथा मंत्र उचारण कर श्री गणेश जी को समर्पित करें ।
ऊँ विघ्ननाशिने नम: नैवेद्यम् समर्पयामि ।
अब श्री गणेश जी को आचमन करायें ।

आचमनं-

चम्मच में जल ले कर मुख शुद्धि के लिये जल समर्पित करें ।
ऊँ विश्वप्रियाय नम: आचमनीयम जलम् समर्पयामि ।

ऋतुफलं –

मंत्र के साथ , फल समर्पित करें तथा आचमन के लिये जल समर्पित करें ।
ऊँ संकटनाशिने नम: ऋतुफलम् समर्पयामि ।

ताम्बूलं (पूंगीफल)

ताम्बूल (पान के पत्ते) को उल्टा करके उस पर लौंग,इलायची, सुपारी एवं कुछ मीठा रखें। दो ताम्बूल बनायें। मंत्र के साथ श्री गणेश जी मुख शुद्धि के लिये ताम्बूल अर्पित करें|
ऊँ फलदात्रे नम: ताम्बूलम् समर्पयामि।

द्र्व्यदक्षिणां-

श्रद्धानुसार पैसा- रूपया हाथ में लेकर मंत्र उच्चारण के साथ श्री गणेश जी को दक्षिणा अर्पित करें ।
ॐ धूम्रवर्णाय नमः दक्षिणाम् समर्पयामि ।

प्रार्थनां:-श्री गणेश

इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर विघ्नविनायक गणेश जी की प्रार्थना करें :-हे सुन्दर मुखवाले गणेश जी! मैं भव बाधा से ग्रस्त भय से पीड़ीत और क्लेशों से सन्तप्त हूँ ,आप मेरे पर प्रसन्न होइए। हे दु:ख दारिद्रय के नाशक गणनायक जी आप मेरी रक्षा करें । हे विघ्नों के विनाशक आपको बार-बार मेरा प्रणाम है ।

चंद्रमा पूजन:-

फिर चंद्रमा को अर्घ्य देवें और कहें :-
हे क्षीरसागरसम्भूत ! हे द्वीजराज ! हे षोडश कलाओं के अधिपति ! शंख में सफेद फूल, चंदन, जल, अक्षत और दक्षिणा लेकर , हे रोहिणी सहित चन्द्रमा ! आप मेरे अर्घ्य को स्वीकार करें। मैं आपको प्रणाम करता हूँ।
उसके बाद गणेश चतुर्थी की कथा सुने अथवा सुनाये। कथा सुनने के बाद आरती, मंत्र-पुष्पाञजलि एवं क्षमा प्रार्थना करें जो कि कथा के अंत मे विधि पूर्वक लिखी हुई है।
कथा के बाद गणेश जी की आरती करें। आरती का तीन बार प्रोक्षण हाथ में जल लेकर आरती पात्र के चारों ओर बायें से दायें घुमाकर जल भूमि पर छोड़ दें| सभी देवी-देवताओं को आरती दें। उपस्थित जनों को आरती दें एवं स्वयं भी लें।

मंत्र-पुष्पाञजलि

दोनों हाथों की अंजली में पुष्प भर कर, हाथ जोड़ कर, दिये हुए मंत्र से, पुष्प श्री गणेश जी को समर्पित करें।
ॐ भुर्भुव: सिद्धि-बुद्धि सहिताय महागणपतये नम:
मंत्र पुष्पाञ्जलिं समर्पयामि ।

मंत्र-पुष्पाञजलि के बाद क्षमा प्रार्थना करें
श्री गणेश जी से क्षमा प्रार्थना के लिए –
अपराध सहस्त्राणि क्रियंते अहथर्निशं मया ।
तानि सर्वानि मे देव क्षमस्व पुरुषोत्तम॥

ब्राह्मणों को भोजन करायें। भोजन के पश्चात् दक्षिणा देवें। दक्षिणा में पांच लड्डु भी देवें । शेष पांच लड्डु में सभी को प्रसाद दें एवं स्वयं भी ग्रहण करें। इसके बाद भोजन करें। रात्रि में भूमि पर शयन करें ।