ॐ श्रीम गम सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः॥
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

महाशिवरात्री पूजन विधि, व्रत विधि एवं कथा (१३ फरवरी २०१८ मंगलवार)-
Mahashivratri (13th February, 2018 - Tuesday) ) ⇒. ⇒.


फागुन कृष्ण पक्ष चतुर्थी पूजा विधि एवं कथा - ०३ फरवरी २०१८ (शनिवार)
Phalgun Krishna Paksha chaturthi Pooja Vidhi and Katha in Hindi -03 February 2018 (Saturday) ⇒. ⇒.


यशोदा जयंती - ०६ फरवरी २०१८ (मंगलवार)
Yashoda Jayanti -06 February 2018 (Tuesday) ⇒. ⇒.

विजया एकादशी व्रत विधि एवं कथा - ११ फरवरी (रविवार) २०१८
vijaya Ekadashi Vrat Vidhi and Katha in Hindi -11 February Sunday 2018 ⇒. ⇒.


मंगल प्रदोष / भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि एवं कथा - १3 फरवरी (मंगलवार) २०१८
Mangal Pradosh / Bhaum Pradosh Vrat Vidhi and Katha in Hindi -13 February tuesday 2018 ⇒. ⇒.


आमलकी या आमला अथवा आंवला एकादशी व्रत विधि एवं कथा - २६ फरवरी (सोमवार) २०१८
amalaki Ekadashi Vrat Vidhi and Katha in Hindi -26 February Monday 2018 ⇒. ⇒.


मंगल प्रदोष / भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि एवं कथा - २७ फरवरी (मंगलवार) २०१८
Mangal Pradosh / Bhaum Pradosh Vrat Vidhi and Katha in Hindi -27 February tuesday 2018 ⇒. ⇒.


• मनुष्य या किसी भी वस्तु की स्थिति का परिवर्तन अलौकिक शक्ति के द्वारा होता है। उस अलौकिक शक्ति का नाम है दशारानी । मनुष्य की दशा अनुकूल होने पर उसका चारों ओर से कल्याण होता है। जबकि यदि दशा प्रतिकूल हो तो अच्छ काम भी बुरा प्रभाव देने लगते हैं । इसीलिये दशारानी माता की पूजा की जाती है और उनके नाम के गँडे लिये जाते हैं । दशा माता की अनुकूलता के लिये दशारानी का व्रत और पूजन किया जाता है। दशा माता व्रत विधि एवं कथा √

• जब तक हमारे जीवन में आशा है तब तक हमारी सभी इच्छायें पूरी होती है। आसामाई की प्रसन्नता से हमारे सभी काम पूरे होते हैं। अत: हमें हमेशा आसामाई को प्रसन्न रखना चाहिये एवं उनका साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिये। यह व्रत स्त्रियों के लिये हैं आस माता पूजा विधि एवं कथा √

• इस वर्ष सरस्वती पूजा २२ जनवरी २०१८ सोमवार (22 January 2018 Monday) को है. माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को देवी सरस्वती की पूजा की जाती है. इसे वसंत पंचमी (Vasant Panchami)भी कहते हैं सरस्वती पूजा (वसंत पंचमी)√

• माघ शुक्ल पक्ष के षष्ठी तिथि को मंदार षष्ठी का व्रत होता है। इस वर्ष यह 23 January 2018 Tuesday [२३ जनवरी २०१८ मंगलवार] को है। मंदार षष्ठी व्रत विधि एवं व्रत कथा ‌”√

• शीतला षष्टी का व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि अथवा छठी तिथि को किया जाता है। यह व्रत इस वर्ष 23 January 2018 Tuesday [२३ जनवरी २०१८ मंगलवार] शीतला षष्टी व्रत विधि एवं व्रत कथा ‌√

• माघ शुक्ल पक्ष के सप्तमी तिथि को “रथ सप्तमी” या “अचला सप्तमी ” का व्रत किया जाता है। इस वर्ष यह व्रत २४ जनवरी (बुधवार) २०१८ [24 january (wednesday)2018] को रखा जायेगा। यह व्रत भगवान सुर्यदेव को समर्पित है। “रथ सप्तमी” या “अचला सप्तमी विधि एवं कथा”√

• माघ मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी को भीष्माष्टमी व्रत मनाया जाता है। यह व्रत इस वर्ष २५ जनवरी बृहस्पतिवार २०१८ को है। [25 january Thursday, 2018] को है। भीष्माष्टमी व्रत विधि एवं कथा√

✅ धनतेरस पूजन विधि (Dhanteras Puja Vidhi) | १७ अक्टूबर मंगलवार २०१७ (17 October -Tuesday - 2017) Next ⇒.


✅ छोटी दीपावाली / नरक चतुर्दशी पूजा विधि ( Choti Diwali / Pujan Vidhi) | १८ अक्टूबर बुधवार २०१७ (18 October - wednesday - 2017) Next ⇒.


✅ भाई दूज पूजा विधि (Bhai Dooj Puja Vidhi) | 21 अक्टूबर मंगलवार २०१७ (21 October -Tuesday - 2017) Next ⇒.


✅ चित्रगुप्त पूजन विधि विस्तार से (chitragupta Puja Vidhi step by step) | 21 अक्टूबर मंगलवार २०१७ (21 October -Tuesday - 2017) Next ⇒.


✅ ॐ. परिवर्तिनी एकादशी व्रत विधि एवं कथा - Parivartini Ekadashi Vrat Vidhi and Katha in Hindi ( ०२ सितम्बर २०१७ (शनिवार) [02 September (Saturday) 2017])⇒.


✅ ॐ. रवि प्रदोष व्रत पूजा विधि एवं कथा & Ravi Pradosh Vrat Vidhi and Katha in Hindi (०३ सितम्बर - रविवार २०१७ (03 September -Sunday - 2017)⇒.



✅ ॐ. आश्विन (क्वार) गणेश चतुर्थी व्रत पूजा विधि
- Ashwin (kwar) Ganesh Chauth Vrat Katha - ०९ सितम्बर,२०१७ (शनिवार) [09 September 2017 (Saturday)]⇒.


• हिंदी मास के अनुसार हर मास में अमावस्या आती है । लेकिन जब किसी भी माह में सोमवार के दिन अमावस्या तिथि पड़ती है तो उसे, सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस वर्ष सोमवती अमावस्या का व्रत २१ अगस्त एवं १८ दिसम्बर २०१७ को है। सोमवती अमावस्या व्रत √

• यह व्रत माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष सकट चौथ ०५ जनवरी २०१८ (शुक्रवार) को है। सकट चौथ √


वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
Vakratund Mahaakaay Suryakoti Samprabh |
Nirvighnam Kuru Men Dev Sarvkaaryeshu Sarvadaa ||

संसार में लगभग ३३ कोटि देवी देवता हैं और सभी देवी देवताओं की पूजा का प्रचलन है । इसी प्रचलन के अनुसार यहाँ अलग अलग महीनो में अलग अलग त्यौहार मनाये जाते हैं । दीवाली उन्ही त्योहारों में से एक है । यह हर प्रान्त, राज्य और विदेशों में मनाया जाने वाला हिन्दुओं का त्यौहार है । "दीवाली" संस्कृत के शब्द "दीपावली" से लिया गया है जिसका अर्थ है "दिए की श्रृंखला" । दीपावली यानि दीपों का त्यौहार । यह पूरे पांच दिनों का त्यौहार है, जो की धनतेरस से शुरू हो कर भाई दूज तक मनाया जाता हैं।

राम का अयोध्या लौटना:-(Returning of Lord Ram to Ayodhya)

कार्तिक अमावस्या के दिन ही भगवान श्री रामचन्द्र जी अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ चौदह वर्षों के वनवास और रावण का वध कर के अयोध्या लौटे थे. उनके आगमन की खुशी में पूरे अयोध्या वासियों ने पूरे देश को मिटटी के दीयों से सजाया था.

लक्ष्मी माता के जन्म और विवाह के उपलक्ष्य में :-(On the occasion of birth and marriage of Goddess Maa Lakshmi)

देवताओं और असुरों के द्वारा समुद्र मंथन के क्रम में माँ लक्ष्मी समुद्र से इसी दिन अवतरित हुई थी. उसी दिन माँ लक्ष्मी का विवाह भगवान विष्णु के साथ संपन्न हुआ था और सभी जगह रोशनी की गयी थी. अतः माँ लक्ष्मी का पूजन और रोशनी करना तभी से प्रचलित है.

माता श्री लक्ष्मी जी की कहानी:-(The story of Goddess Maa Lakshmi)

प्राचीन समय में एक नगर में एक साहूकार था उसकी एक लड़की थी । वह नित्य पीपल के पेड़ (पीपल देवता) की पूजा करती थी । उस लड़की ने देखा की श्री महालक्ष्मी जी उसी पीपल के पेड़ से निकला करती हैं । एक दिन लक्ष्मी जी ने उस लड़की से बोला की मैं तुझ पर बहुत पर प्रसन्न हूँ, इसलिए तू मेरी सहेली बन जा । लड़की बोली क्षमा कीजिये मैं अपने माता पिता से पूछ कर बताउंगी । इसके बाद वह अपने माता पिता की आज्ञा प्राप्त कर माता लक्ष्मी की सहेली बन गयी । माता लक्ष्मी उसे बड़ा प्रेम करती थी ।
एक दिन महालक्ष्मी ने उसे भोजन के लिए निमंत्रण दिया । जब लड़की भोजन के लिए गयी तो लक्ष्मी जी ने उस लड़की को सोने चांदी के बर्तनों में खाना खिलाया और सोने की चौकी पर बैठाया और दिव्य दुशाला उसे ओढ़ने को दिया । तब लक्ष्मी जी ने कहा की मैं भी कल तुम्हारे यहां भोजन के लिए आउंगी । लड़की ने स्वीकार कर अपने माता पिता से मिलकर सब हाल सुनाया तो उसके माता पिता सुनकर बहुत प्रसन्न हुए । परन्तु लड़की उदास थी तो उसके माता पिता ने पूछा की क्या हुआ तब लड़की ने कहा की माता लक्ष्मी जी का वैभव बहुत बड़ा है, मैं उन्हें कैसे संतुष्ट करुँगी ।
लड़की के पिता ने कहा की बेटी पृथ्वी को गोबर से लीप कर जैसा भी बन पाये रुखा सूखा उन्हें श्रद्धा और प्रेम से खिला देना , यह कहते ही अचानक एक चील ऊपर मंडराती हुई किसी रानी का नौलखा हार डाल गयी यह देख कर लड़की बहुत प्रसन्न हुई । लड़की ने हार को थाल में रख कर दुशाले से ढ़क दिया । तब तक माता लक्ष्मी और श्री गणेश जी भी वंहा आ गए तो लड़की ने उन्हें नौलखा हार लेने को कहा तो माता लक्ष्मी जी ने कहा ये राजा रानी के लिए हैं हमें क्या जरुरत है लड़की ने प्रार्थना किया तो गणेश लक्ष्मी ने भोजन किया और साहूकार का घर सुख सम्पति से भर गया । जिस प्रकार साहूकार का घर सुख सम्पति से भर दिए उसी प्रकार उसी तरह सभी के घरों में सुख सम्पति प्रदान करें ।