ॐ श्रीम गम सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः॥
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

मई २०१८ माह के व्रत एवं त्योहर - List of Festival in April 2018

०३ मई २०१८ बृहस्पतिवार - √ " ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष चतुर्थी “आखू (मूषक)” " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२० मई (रविवार) २०१८ - √ " अधिक (लौंद) मास शुक्ला षष्ठी ” " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१५ मई २०१८ मंगलवार - √ " वट सावित्री व्रत ” " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

११ मई २०१८ (शुक्रवार) - √ " अपरा एकादशी ” " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२५ मई (शुक्रवार) २०१८ - √ " अधिक मास / पद्मिनी एकादशी व्रत ” " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१३ मई - रविवार २०१८ - √ " रवि प्रदोष व्रत ” " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२६ मई (शनिवार) २०१८ - √ " शनि त्रयोदशी (शनि प्रदोष) ” " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२४ मई, २०१८ बृहस्पतिवार - √ " गंगा दशहरा का त्योहार ” " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

अप्रैल माह के व्रत एवं त्योहर - List of Festival in April 2018

०३ अप्रैल २०१८ मंगलवार - √ " वैसाख संकष्ठी / अंगारकी चतुर्थी " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१२ अप्रैल २०१८ बृहस्पतिवार - √ " वरुथिनी एकादशी " (व्रत विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१३ अप्रैल २०१८ शुक्रवार - √ " शुक्र प्रदोष " (व्रत विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१८ अप्रैल २०१८ बुधवार - √ " परशुराम जयंती " (पूजा विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१८ अप्रैल २०१८ बुधवार - √ " अक्षय तृतिया " (पूजा विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२१ अप्रैल (शनिवार) २०१८ - √ " वैशाख शुक्ला स्कंद-षष्ठी " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२२ अप्रैल २०१८ रविवार - √ " शर्करा सप्तमी " (पूजा विधि एवं सौर सूक्त) ⇒.

२२ अप्रैल २०१८ रविवार - √ " गंगा सप्तमी " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२२ अप्रैल २०१८ रविवार - √ " सर्वरोगहारी निम्ब (नीम) सप्तमी व्रत " ⇒.

२४ अप्रैल २०१८ मंगलवार - √ " सीता नवमी या जानकी नवमी " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२६ अप्रैल २०१८ बृहस्पतिवार - √ " मोहिनी एकादशी " (व्रत विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२६ अप्रैल २०१८ बृहस्पतिवार - √ परशुराम द्वादशी / जामदगन्य द्वादशी व्रत विधि एवं कथा (विधि विधान से) ⇒.

२७ अप्रैल २०१८ शुक्रवार - √ " शुक्र प्रदोष " (व्रत विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२७, २८, २९ और ३० अप्रैल २०१८ - √ " पुष्करिणी (वैशाख मास की अंतिम तीन तिथियां - त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा का महत्व) " ⇒.

२८ अप्रैल २०१८ शनिवार - √ " नृसिंह जयंती " (पूजा विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

३० अप्रैल २०१८ सोमवार - √ वैशाख पूर्णिमा / बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima / Baisakh Purnima) ⇒.

१२ सितम्बर, २०१८ (बुधवार) - √ " हरकाली व्रत | Harkali Vrat " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२७ जूलाई २०१८ (शुक्रवार) - Friday, 27 July 2018 - √ " गुरु पूर्णिमा | Guru Purnima 2018 " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

- √ " विवाह में गठबंधन और गठबंधन में रखे गये सामानों का महत्त्व " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२५ जून,२०१८ (सोमवार) - √ " दुर्गन्धि- दुर्भाग्यनाशक व्रत " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१२ मई, २०१९ (रविवार) एवं ६ अक्टूबर, २०१९ (रविवार) - √ " आदित्याष्टमी व्रत " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि से आठ दिन तक - √ " आशा भोगती का व्रत " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२३ अप्रैल, २०१८ (सोमवार) एवं १७ सितम्बर, २०१८ (सोमवार) - √ " सोमाष्टमी व्रत " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१० अक्टूबर,२०१८(बुधवार) - √ " अशोक व्रत " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१२ सितम्बर, २०१८ (बुधवार) - √ " गोष्पद व्रत " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१६ जून, २०१८ (शनिवार) - √ " रम्भा तृतीया व्रत " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२४ मई, २०१८ बृहस्पतिवार - √ " गंगा दशहरा " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

भाद्र मास के किसी भी शुभ तिथि को करते हैं। - √ " गाज माता का व्रत " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

११ सितम्बर (मंगलवार) २०१८ - √ " गाजबीज की पूजा " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१९ अगस्त (रविवार) २०१८ - √ " कजरी नवमी " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

 

३१ अक्टूबर, २०१८ (बुधवार) - √ " अहोई अष्टमी व्रत " (पूजा विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

यह व्रत कार्तिक मास में किया जाता है। - √ " तारा भोजन व्रत कथा " (पूजा विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२३ जुलाई (सोमवार), २०१८ - √ " श्रीकृष्ण द्वादशी " (पूजा विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२४ जून (रविवार), २०१८ - √ " श्रीरामलक्ष्मण द्वादशी " (पूजा विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१४ जून, २०१८ (बृहस्पतिवार) - √ " करवीर व्रत " ⇒.

कार्तिक माह - √ " पोपा बाई की कथा " ⇒.

मंगलागौरी-व्रत विधि एवं कथा (सावन में) - √ " विधि विधान से " ⇒.

मंगला गौरी उद्यापन विधि (सावन में) - √ " विधि विधान से " ⇒.

सावन सोमवार व्रत विधान - √ " विधि विधान से " ⇒.

सावन सोमवार व्रत उद्यापन विधि - √ " विधि विधान से " ⇒.

श्री धर्मराज व्रत कथा एवं आरती - √ " विधि विधान से " ⇒.

दुर्गन्धि- दुर्भाग्यनाशक व्रत - √ "२५ जून,२०१८ (सोमवार) विधि विधान से " ⇒.

विवाह में गठबंधन और गठबंधन में रखे गये सामानों का महत्त्व ⇒.

गुरु पूर्णिमा | Guru Purnima 2018 - २७ जूलाई २०१८ (शुक्रवार) - Friday, 27 July 2018 ⇒.

हरकाली व्रत | Harkali Vrat - १२ सितम्बर, २०१८ (बुधवार) ⇒.

कोकिलाव्रत । Kokila Vrat । २७ जुलाई, २०१८ (शुक्रवार) से आरम्भ होगा एवं २६ अगस्त (रविवार) को पूर्ण होगा। ⇒.

शान्तिव्रत - Shanti Vrat ⇒.

व्यास पूजा - Vyas Puja ⇒.

विशोक षष्ठी व्रत ⇒.

जानिये क्यों होते हैं माला में १०८ दाने ⇒.

राम की मिट्टी भी सोना होवे ⇒.

ऋषि पंचमी व्रत विधि एवं कथा - १४ सितम्बर, २०१८ (शुक्रवार) ⇒.

List Of Skand Shasti 2018
वर्ष २०१८ के स्कंद षष्ठी व्रत विधि एवं कथा

२१ अप्रैल (शनिवार) २०१८ - √ " वैशाख शुक्ला स्कंद-षष्ठी " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

२० मई (रविवार) २०१८ - √ " अधिक (लौंद) मास शुक्ला षष्ठी" (व्रत विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१८ जून (सोमवार) २०१८ - √ " ज्येष्ठ मास की शुक्ल " (व्रत विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१७ जुलाई (मंगलवार) २०१८ - √ "आषाढ़ शुक्ल षष्ठी" (पूजा विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१६ अगस्त (बृहस्पतिवार) २०१८ - √ "श्रावण शुक्ला षष्ठी " (पूजा विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१४ सितम्बर (शुक्रवार) २०१८ - √ "चंदनषष्ठी (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१४ अक्टूबर (रविवार) २०१८ - √ "आश्विन शुक्ला षष्ठी " (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१३ नवम्बर (मंगलवार) २०१८ - √ "कार्तिक शुक्ला षष्ठी" (पूजा विधि एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१३ दिसम्बर (बृहस्पतिवार) २०१८ - √ "मार्गशीर्ष शुक्ला षष्ठी" (व्रत विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१२ जनवरी (शनिवार) २०१९ - √ "पौष मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी " (व्रत विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१० फरवरी (रविवार) २०१९ - √ वरुणषष्ठी व्रत विधि एवं कथा (विधि विधान से) ⇒.

१२ मार्च (मंगलवार) २०१९ - √ " फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष षष्ठी विधि एवं कथा " (व्रत विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

१० अप्रैल (बुधवार) २०१९ - √ " चैत्र शुक्ला षष्ठी " (पूजा विधि महत्व एवं कथा विधि विधान से) ⇒.

List of Festival in March 2018

✅ हनुमान जयंती पूजा विधि एवं कथा (विधि विधान से) ३१ मार्च, २०१८ (31 March 2018) Next ⇒

✅ रामनवमी पूजा विधि एवं कथा (विधि विधान से) २५ मार्च २०१८ (25 March 2018) Next ⇒

✅ पजूनो-पूनो पूजन विधि एवं कथा (विधि विधान से) ३१ मार्च, २०१८ शनिवार (31 March 2018 Saturday) Next ⇒Next ⇒

✅ गणगौर व्रत विधि एवं कथा (Gangaur Vrat Vidhi and Katha) Next ⇒.

 

✅ २७ मार्च (मंगलवार) २०१८ कामदा एकादशी (27 March (Tuesday) Kamada Ekadashi) ..Next ⇒

 

✅ २९ मार्च २०१८ (बृहस्पतिवार) - बृहस्पति प्रदोष व्रत विधि एवं कथा (29th March 2018) ..Next ⇒

 

✅ बुधाष्टमी पूजा विधि एवं कथा (Budhashtami Puja Vidhi and katha) 30 march 2018..Next ⇒

 

✅ आस माता पूजा विधि एवं कथा Aas Mata Puja Vidhi and Katha in Hindi - Next ⇒.

 

✅ दशा माता व्रत विधि एवं कथा:- मनुष्य या किसी भी वस्तु की स्थिति का परिवर्तन अलौकिक शक्ति के द्वारा होता है। उस अलौकिक शक्ति का नाम है दशारानी । मनुष्य की दशा अनुकूल होने पर उसका चारों ओर से कल्याण होता है। जबकि यदि दशा प्रतिकूल हो तो अच्छ काम भी बुरा प्रभाव देने लगते हैं । इसीलिये दशारानी माता की पूजा की जाती है और उनके नाम के गँडे लिये जाते हैं । दशा माता की अनुकूलता के लिये दशारानी का व्रत और पूजन किया जाता है। - Next ⇒.

✅ फागुन कृष्ण पक्ष चतुर्थी पूजा विधि एवं कथा - ०३ फरवरी २०१८ (शनिवार)
Phalgun Krishna Paksha chaturthi Pooja Vidhi and Katha in Hindi -03 February 2018 (Saturday) ⇒. ⇒.

 

✅ महाशिवरात्री पूजन विधि, व्रत विधि एवं कथा (१३ फरवरी २०१८ मंगलवार)-
Mahashivratri (13th February, 2018 - Tuesday) ) ⇒. ⇒.

 

✅ यशोदा जयंती - ०६ फरवरी २०१८ (मंगलवार)
Yashoda Jayanti -06 February 2018 (Tuesday) ⇒. ⇒.

✅ विजया एकादशी व्रत विधि एवं कथा - ११ फरवरी (रविवार) २०१८
vijaya Ekadashi Vrat Vidhi and Katha in Hindi -11 February Sunday 2018 ⇒. ⇒.

 

✅ मंगल प्रदोष / भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि एवं कथा - १3 फरवरी (मंगलवार) २०१८
Mangal Pradosh / Bhaum Pradosh Vrat Vidhi and Katha in Hindi -13 February tuesday 2018 ⇒. ⇒.

 

✅ आमलकी या आमला अथवा आंवला एकादशी व्रत विधि एवं कथा - २६ फरवरी (सोमवार) २०१८
amalaki Ekadashi Vrat Vidhi and Katha in Hindi -26 February Monday 2018 ⇒. ⇒.

 

✅ मंगल प्रदोष / भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि एवं कथा - २७ फरवरी (मंगलवार) २०१८
Mangal Pradosh / Bhaum Pradosh Vrat Vidhi and Katha in Hindi -27 February tuesday 2018 ⇒. ⇒.

 

• इस वर्ष सरस्वती पूजा २२ जनवरी २०१८ सोमवार (22 January 2018 Monday) को है. माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को देवी सरस्वती की पूजा की जाती है. इसे वसंत पंचमी (Vasant Panchami)भी कहते हैं सरस्वती पूजा (वसंत पंचमी)√

• माघ शुक्ल पक्ष के षष्ठी तिथि को मंदार षष्ठी का व्रत होता है। इस वर्ष यह 23 January 2018 Tuesday [२३ जनवरी २०१८ मंगलवार] को है। मंदार षष्ठी व्रत विधि एवं व्रत कथा ‌”√

• शीतला षष्टी का व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि अथवा छठी तिथि को किया जाता है। यह व्रत इस वर्ष 23 January 2018 Tuesday [२३ जनवरी २०१८ मंगलवार] शीतला षष्टी व्रत विधि एवं व्रत कथा ‌√

• माघ शुक्ल पक्ष के सप्तमी तिथि को “रथ सप्तमी” या “अचला सप्तमी ” का व्रत किया जाता है। इस वर्ष यह व्रत २४ जनवरी (बुधवार) २०१८ [24 january (wednesday)2018] को रखा जायेगा। यह व्रत भगवान सुर्यदेव को समर्पित है। “रथ सप्तमी” या “अचला सप्तमी विधि एवं कथा”√

• माघ मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी को भीष्माष्टमी व्रत मनाया जाता है। यह व्रत इस वर्ष २५ जनवरी बृहस्पतिवार २०१८ को है। [25 january Thursday, 2018] को है। भीष्माष्टमी व्रत विधि एवं कथा√

✅ धनतेरस पूजन विधि (Dhanteras Puja Vidhi) | १७ अक्टूबर मंगलवार २०१७ (17 October -Tuesday - 2017) Next ⇒.

 

✅ छोटी दीपावाली / नरक चतुर्दशी पूजा विधि ( Choti Diwali / Pujan Vidhi) | १८ अक्टूबर बुधवार २०१७ (18 October - wednesday - 2017) Next ⇒.

 

✅ भाई दूज पूजा विधि (Bhai Dooj Puja Vidhi) | 21 अक्टूबर मंगलवार २०१७ (21 October -Tuesday - 2017) Next ⇒.

 

✅ चित्रगुप्त पूजन विधि विस्तार से (chitragupta Puja Vidhi step by step) | 21 अक्टूबर मंगलवार २०१७ (21 October -Tuesday - 2017) Next ⇒.

 

✅ ॐ. परिवर्तिनी एकादशी व्रत विधि एवं कथा - Parivartini Ekadashi Vrat Vidhi and Katha in Hindi ( ०२ सितम्बर २०१७ (शनिवार) [02 September (Saturday) 2017])⇒.

 

✅ ॐ. रवि प्रदोष व्रत पूजा विधि एवं कथा & Ravi Pradosh Vrat Vidhi and Katha in Hindi (०३ सितम्बर - रविवार २०१७ (03 September -Sunday - 2017)⇒.

 

✅ ॐ. आश्विन (क्वार) गणेश चतुर्थी व्रत पूजा विधि
- Ashwin (kwar) Ganesh Chauth Vrat Katha - ०९ सितम्बर,२०१७ (शनिवार) [09 September 2017 (Saturday)]⇒.

 

२९ जुलाई, २०१८ रविवार से प्रारम्भ - √ " फल द्वितीया (अशून्यशयन व्रत) " ⇒.

• हिंदी मास के अनुसार हर मास में अमावस्या आती है । लेकिन जब किसी भी माह में सोमवार के दिन अमावस्या तिथि पड़ती है तो उसे, सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस वर्ष सोमवती अमावस्या का व्रत 04 February 2019 Monday (०४ फरवरी २०१९ सोमवार), 03 June 2019 Monday (०३ जून २०१९ सोमवार) और 28 October 2019 Monday (२८ अक्टूबर २०१९ सोमवार) को है। सोमवती अमावस्या व्रत √

• यह व्रत माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष सकट चौथ ०५ जनवरी २०१८ (शुक्रवार) को है। सकट चौथ √


वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
Vakratund Mahaakaay Suryakoti Samprabh |
Nirvighnam Kuru Men Dev Sarvkaaryeshu Sarvadaa ||

संसार में लगभग ३३ कोटि देवी देवता हैं और सभी देवी देवताओं की पूजा का प्रचलन है । इसी प्रचलन के अनुसार यहाँ अलग अलग महीनो में अलग अलग त्यौहार मनाये जाते हैं । दीवाली उन्ही त्योहारों में से एक है । यह हर प्रान्त, राज्य और विदेशों में मनाया जाने वाला हिन्दुओं का त्यौहार है । "दीवाली" संस्कृत के शब्द "दीपावली" से लिया गया है जिसका अर्थ है "दिए की श्रृंखला" । दीपावली यानि दीपों का त्यौहार । यह पूरे पांच दिनों का त्यौहार है, जो की धनतेरस से शुरू हो कर भाई दूज तक मनाया जाता हैं।

राम का अयोध्या लौटना:-(Returning of Lord Ram to Ayodhya)

कार्तिक अमावस्या के दिन ही भगवान श्री रामचन्द्र जी अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ चौदह वर्षों के वनवास और रावण का वध कर के अयोध्या लौटे थे. उनके आगमन की खुशी में पूरे अयोध्या वासियों ने पूरे देश को मिटटी के दीयों से सजाया था.

लक्ष्मी माता के जन्म और विवाह के उपलक्ष्य में :-(On the occasion of birth and marriage of Goddess Maa Lakshmi)

देवताओं और असुरों के द्वारा समुद्र मंथन के क्रम में माँ लक्ष्मी समुद्र से इसी दिन अवतरित हुई थी. उसी दिन माँ लक्ष्मी का विवाह भगवान विष्णु के साथ संपन्न हुआ था और सभी जगह रोशनी की गयी थी. अतः माँ लक्ष्मी का पूजन और रोशनी करना तभी से प्रचलित है.

माता श्री लक्ष्मी जी की कहानी:-(The story of Goddess Maa Lakshmi)

प्राचीन समय में एक नगर में एक साहूकार था उसकी एक लड़की थी । वह नित्य पीपल के पेड़ (पीपल देवता) की पूजा करती थी । उस लड़की ने देखा की श्री महालक्ष्मी जी उसी पीपल के पेड़ से निकला करती हैं । एक दिन लक्ष्मी जी ने उस लड़की से बोला की मैं तुझ पर बहुत पर प्रसन्न हूँ, इसलिए तू मेरी सहेली बन जा । लड़की बोली क्षमा कीजिये मैं अपने माता पिता से पूछ कर बताउंगी । इसके बाद वह अपने माता पिता की आज्ञा प्राप्त कर माता लक्ष्मी की सहेली बन गयी । माता लक्ष्मी उसे बड़ा प्रेम करती थी ।
एक दिन महालक्ष्मी ने उसे भोजन के लिए निमंत्रण दिया । जब लड़की भोजन के लिए गयी तो लक्ष्मी जी ने उस लड़की को सोने चांदी के बर्तनों में खाना खिलाया और सोने की चौकी पर बैठाया और दिव्य दुशाला उसे ओढ़ने को दिया । तब लक्ष्मी जी ने कहा की मैं भी कल तुम्हारे यहां भोजन के लिए आउंगी । लड़की ने स्वीकार कर अपने माता पिता से मिलकर सब हाल सुनाया तो उसके माता पिता सुनकर बहुत प्रसन्न हुए । परन्तु लड़की उदास थी तो उसके माता पिता ने पूछा की क्या हुआ तब लड़की ने कहा की माता लक्ष्मी जी का वैभव बहुत बड़ा है, मैं उन्हें कैसे संतुष्ट करुँगी ।
लड़की के पिता ने कहा की बेटी पृथ्वी को गोबर से लीप कर जैसा भी बन पाये रुखा सूखा उन्हें श्रद्धा और प्रेम से खिला देना , यह कहते ही अचानक एक चील ऊपर मंडराती हुई किसी रानी का नौलखा हार डाल गयी यह देख कर लड़की बहुत प्रसन्न हुई । लड़की ने हार को थाल में रख कर दुशाले से ढ़क दिया । तब तक माता लक्ष्मी और श्री गणेश जी भी वंहा आ गए तो लड़की ने उन्हें नौलखा हार लेने को कहा तो माता लक्ष्मी जी ने कहा ये राजा रानी के लिए हैं हमें क्या जरुरत है लड़की ने प्रार्थना किया तो गणेश लक्ष्मी ने भोजन किया और साहूकार का घर सुख सम्पति से भर गया । जिस प्रकार साहूकार का घर सुख सम्पति से भर दिए उसी प्रकार उसी तरह सभी के घरों में सुख सम्पति प्रदान करें ।